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Author: Kokila Agarwal

Kokila Agarwal
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House wife, M. A , B. Ed., Fond of Reading & Writing

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

२१२२--१२१२--२२ आ रहा है कोई पास दिल के भी आ रहा है कोई ख्वाब [...]

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इक सिवा सांस के क्या बाकी है ज़िंदगी अब भी क्यूं सताती [...]

२२--२२--२२--२२ आर बना नफ़रत को तू अब प्यार बना स्वर्ग धरा को ही [...]

२१२२--२१२२--२१२२ ई है कोशिशे नाकाम तो हरदम रही है चल रहे हैं [...]

२१२२--१२१२--२२ अर गया कब का आंख से तो उतर गया कब का जख्म सीने [...]

१२२२--१२२२--१२२ अक है हमारी चाह तो बस तुम तलक है तुम्ही बोलो [...]

मापनी 221 2121 1221 212 गीत:- मिलती है ज़िन्दगी में मुहब्बत कभी [...]

२२१--१२२१--१२२१--१२२ ईर अलग है जाना ही नहीं प्यार की तो पीर अलग [...]

२१२२--२१२२--२१२२--२१२ आ सकते नहीं दिल बहलता ही नहीं हम ये बता [...]

नमन साथियो। पहली कोशिश देखिये-- दिया दहलीज का क्यूं कांपता [...]

१२२२--१२२२--१२२ आ रहूंगा अकेला जान घबराना नहीं तू मैं तेरे [...]

२१२२--११२२--११२२--२२ आयें कैसे जाने वाले भी भला लौटके आयें [...]

२१२२--१२१२--२२ आन रख लेते हम हथेली पे जान रख लेते तुम अगर कुछ [...]

२२--२२--२२--२२ आ कर देखो मन की आग बुझाकर देखो दिल अपना दरिया कर [...]

गज़ल

१२२-१२२-१२२-१२ आने लगी शमा दिलजलो को जलाने लगी पतंगो को यूं [...]

गज़ल

२१२२--२१२२--२१२२--२१२ आना हो गया रब की थी मर्ज़ी गली में उनका [...]

गज़ल

२१२२--१२१२--२२ आ रहा है कोई पास दिल के भी आ रहा है कोई ख्वाब [...]

कफ़न

मुस्कुरा जब जब बढ़ाया इक कदम तूफ़ान नज़रों में समाया दम- ब- [...]

मन

कभी सोचो कि पल दो पल जियें खुद के लिये यारो कभी सोचो कि कोई [...]

मैं

हर लम्हा पुकारती हूं मैं.. हर लम्हा हारती हूं मैं.. समझ न [...]

मैं

गुज़रती हूं अंधेरो से लिये तक़दीर हाथों में बिखरती हूं [...]

काश मुझे भी बिटिया होती

रचनाकार- Kokila Agarwal विधा- कविता काश मुझे भी बिटिया होती उसकी [...]

मन

मन --- आंख खोल जब वो मुस्काया प्रथम परिचय बंदिश का [...]

काश मुझे भी बिटिया होती

काश मुझे भी बिटिया होती उसकी आंखो में खुद को जीती महकी मेरी [...]

मुक्तक

ज्ञान पिपासा भोले पंछी चुग चुगके सब पान लिया आत्मसात करके [...]

गया साल

गया साल हर ले गया कुछ झूठी उम्मीदो की आस जीवन का रास छोड़ [...]

सत्रह

छ:छ: पांच सत्रह का एक दांव शकुनि का क्या बोल गया विवश हुआ [...]

ज़िंदगी यूं भी मिलेगी

ज़िंदगी यूं भी मिलेगी ये कभी सोचा न था लम्हा लम्हा बिंध [...]

बांझ

सुमन गर्म कपड़ो का संदूक खोले कितनी देर से बैठी थी। बेटे का [...]

क्या करे

क्या करे---- खुशी , कैसी खुशी अर्जित कर रहा था अखिल जो किसी के [...]