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Author: Manjusha Srivastava

Manjusha Srivastava
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

स्वतंत्रता दिवस

स्वतंत्रता दिवस है आज मिल के गायेंगे उत्सव मनाएँगे यहाँ [...]

माँ

माँ माँ ! शब्दों से परे , एहसास की भाषा है | माँ ! माथे की सिलवट [...]

माँ

माँ जीवन की अरुणाई माँ है , भीनी सी अमराई माँ है , त्याग [...]

शक्ति

शक्ति ******* जगदम्बिके तुम शक्ति का भंडार हो दो शक्ति ऐसी [...]

मुक्तक

रोटी (1) मन क्लान्त है दुख शोक से सम्भावनाएँ शून्य हैं [...]

मुक्तक

(1) सुखद परिवर्तन हो जिस रोज चाँदनी फैलेगी उस रोज प्रेम [...]

मुक्तक

[ 1 ] किस सोंच प्रिये तुम बैठी हो ,क्यों अधर कुसुम कुम्हलाए हैं [...]

अभिलाषा

अभिलाषा बौरों से लदी हों अमरायी , कोयल की कुहुकती तान [...]

शिरीष

शिरीष ********* आतप वात के आघातों से बन जाता है त्रासक वातावरण [...]

प्रकृति का अनुभव

(1) प्रकृति का अनुभव ********************* राजगीर की पहाडियाँ कुछ ऊँची कुछ [...]

यादें

ज़िंदगी के कैनवास पर उकेरो सुनहरे ,रुपहले पल ज़िंदगी के कोरे [...]

स्मृतियाँ

पुलकित है प्यासा मन नाच उठा अंतर मन बरसे यह सावन घन उमड़ [...]

पावस की महिमा

तपन भरे इस जग को आकर घेरा जब काले मेघों ने | पावस का स्वागत [...]

प्रकाश की ओर

बौद्धिक तत्वों से उलझती रही आव्रत्त... समझ नही पायी , संसार के [...]