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Author: राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'

राजीव शर्मा 'ब्रजरत्न'
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न मंजिल पता है, न डगर हमें मालूम है, रुकना कहाँ है, मुझे नहीं मालूम है, धक्का दे रहा है ये जमाना मुझे, कहाँ धकेलना चाहता है ,ये मुझे नहीं मालूम है।

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कविता (3 Posts)


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