साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: कुमार करन 'मस्ताना'

कुमार करन 'मस्ताना'
Posts 7
Total Views 135
(Poet/Lyricist/Writer) MEMBER OF :- (1) Film Writer's Association, Mumbai. (2) The Poetry Society of India.

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

क्या हिन्दू क्या मुस्लिम यारों

क्या हिन्दू,क्या मुस्लिम यारों ये अपनी नादानी है! बाँट रहे [...]

माँ मत ला आँखों में पानी

हे भारती! क्यों होती है उदास हम पूतों पर रख विश्वास नहीं [...]

यह उस औरत की लाश है..

यह उस औरत की लाश है यह उस औरत की लाश है...! जिसने सबको जन्म दिया [...]

टूट रहा है हिन्द हमारा

सुनो समय की करुण पुकार ले डूबेगा यह अंधकार पुनः न हो जाए माँ [...]

औरत होना अभिशाप क्यों

अपनी स्वतंत्रता, अपना अधिकार क्यों जग से मांगना पाप [...]

अपनी यह ख़ामोशी तोड़

सहोगे कब तक यह प्रहार छीन रहा तेरा अधिकार बहुत हुआ [...]

परिवर्तन

सड़कों पर, तीव्र गति से भागती गाड़ियाँ, आकाश में उड़ते हवाई [...]