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Author: kapil Jain

kapil Jain
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नाम:कपिल जैन -भोपाल मध्य प्रदेश जन्म : 2 मई 1989 शिक्षा: B.B.A E-mail:-kapil46220@gmail.com

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुद्दतें लगी खुद को चलना सिखाने में,

मुद्दतें लगी खुद को चलना सिखाने में, चंद वक़्त लगा,ठोकर को [...]

कोई ख़ुशी मेरी देहलीज तक नही आती

अब कोई ख़ुशी मेरी देहलीज तक नही आती बेमकसद चल रही हैं [...]

ऐ मंज़िल अब तो आ…

ऐ मंज़िल अब तो आ.. थक गए राह चलते चलते लड़खड़ाते हैं कदम, पैर हो [...]

जब जज़्बात दिलों मे दम तोड़ते हैं…..

जब जज़्बात दिलों मे दम तोड़ते हैं कहीं न कहीं तो असर छोड़ते हैं [...]

ऐ वक़्त फिर लौट आओ तुम…

हो जाओ खुद मुझ जैसा, या अपना सा बनाओ तुम। मिटाओ अधूरी [...]

एक बार बता तो आखिर बात क्या है ?

एक बार बता तो आखिर बात क्या है ? खफा होना तो हक़ है तेरा, मगर ये [...]

खामोश क्यूँ है तू,कुछ तो जवाब दे…

मुद्दतों के इंतज़ार का,मुझे कुछ तो खिताब दे. खामोश क्यूँ है [...]

रोम रोम में बेचैनी और आँखों में आँसू लायी.

आज फिर तेरी याद आई-२ रोम रोम में बेचैनी और आँखों में आँसू [...]

याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर,

याद आकर रोज रातों को मुझे जगाया मत कर, रोतें हैं जाने के बाद [...]

लिखदूं कुछ अलफ़ाज़ में यूँ जो पढे तू मेरी हो जाए ।

लिखदूं कुछ अलफ़ाज़ में यूँ जो पढे तू मेरी हो जाए । तनहा [...]

में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ..

गुजरे लम्हों को बुलाने में लगा रेहता हूँ, में उसे अपना बनाने [...]

जरुरी नही हर बात कहें,कुछ दर्द छुपे ही रहने दो…

जरुरी नही हर बात कहें कुछ दर्द छुपे ही रहने दो लबो को न दो [...]

कौन यहाँ दूध का धुला है बता दो ।

ताउमर गर साथ चलो रास्ते मुश्किलात भरे करो आज ही फैसला और [...]

अकेले बैठतें हैं अब,जब भी कभी,

अकेले बैठतें हैं अब,जब भी कभी, कुछ गजलें उतार देते हैं कागजों [...]