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Author: Jitendra Anand

Jitendra Anand
Posts 150
Total Views 789
हम जितेंद्र कमल आनंद को यह साहित्य पीडिया पसंद हैं , हमने इसलिए स्वरचित ११४ रचनाएँ पोस्ट कर दी हैं , यह अधिक से अधिक लोगों को पढने को मिले , आपका सहयोग चाहिए, धन्यवाद ----- जितेन्द्रकमल आनंद

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

हिंदी है भारत की बिंदी ( गीत) जितेंद्र कमल आनंद

हिंदी है भारत की बिंदी, इसको लाल चमकने दें हिंदी है गरिमा [...]

ऑगन में भी चहके – महकें ( गीत) जितेंद्र कमल आनंद

ऑगन में भी चहकें- महकें । अमृत भर गागर से छलकें ।। अच्छाई को [...]

मेरे स्वर संगम सँग वीणा अंतरमन ने ( गीत) जितेंद्रकमलआनंद

मेरे स्वर संगम सँग वीणा अन्तर्मन ने आज बजायी । तेरे अंतस के [...]

रंग सारे छोडकर ( गीत) जितेंद्र कमल आनंद

रंग सारे छोडकर , हम हंस हो गये । रंग सारे ग्रहण कर तुम श्याम हो [...]

खोलो उर के द्वार बंद ऑखों को खोलो ( गीत )

खोलो उर के द्वार, बंद ऑखों को खोलो ! निखिल विश्व का प्यार [...]

कविता : हुआ अपेक्षित है आवश्यक

हुआ अपेक्षित है आवश्यक,सद् मारग पर तुमको चलना। परहितार्थ [...]

इस स्थावर जंगम जगत् का जो मूल तत्व( घनाक्षरी)

इस स्थावर जंगम जगत् का जो मूल तत्त्व, बीज प्रधान सत्त्व, [...]

परमब्रह्म हैं जो परमपुरुष जिनसे ( घनाक्षरी)

परमब्रह्म हैं जो परमपुरुष जिनसे- विष्णु भी पाते ऐश्वर्य [...]

हरि- नारायण,विष्णु जो कृष्ण के स्वअंश हैं( घनाक्षरी)

हरि- नारायण ,विष्णु जो कृष्ण के स्व- अंश हैं, प्राप्त करते हैं [...]

जग गया भारत : जितेंद्रकमल आनंद ( पोस्ट १६२)

जग गयी भारत हमारा देश भावन। छँट गये बादल तमिस्रा के घनेरे [...]

मंजरी को चाहता हूँ ( गीत ) पोस्ट -२३जितेंद्रकमलआनंद( पोस्ट१६५)

माधुरी को चाहता हूँ ( गीत ) तुम हिरन सम मरुथलों में दौडना [...]

घनाक्षरी:: मेरे लिए कुछ भी न दूर और : जितेंद्र आनंद( पो १६३)

मेरे लिए कुछ भी न दूर और समीप ही, मेरा प्रतिबिम्ब ही तो होता [...]

मुक्तक: हर सुबह एक नई प्यास: जितेंद्रकमलआनंद( पोस्ट१६२)

हर सुबह एक नई आस लिए होती है । हर दोपहर अमिट प्यास लिए होती है [...]

हम मानव हैं हरित धरा के :: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १५९)

हम मानव हैं हरित धरा के ,मानवता से नाता है । भारत भाग्य विधाता [...]

हरषाती धूप : जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट १६१)

गीत: हरषाती धूप जाड़े के मौसम में हरषाती धूप खेतों में , [...]

यह ब्रह्मही है आत्मा ,आत्माही है: जितेन्द्र कमल आनंद ( पो १४२)

घनाक्षरी ----------- यह ब्रह्म ही है आक्मा, आत्मा ही ब्रह्म [...]

सत्यके सुदर्शन जिसे होते हैं:: जितेंद्रकमल आनंद ( पोस्ट१४०)

घनाक्षरी:-- ---------- सत्यके सुदर्शन जिसे होते हैं अलौकिक , आत्मपद [...]

फिर एक ग़ज़ल — जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट १४०)

गॉव के पोखर में खिल उठे कमल सॉसों में पल गई फिर एक [...]

स्वप्नवत् हो भ्रांतियॉ जिसके :: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१३९)

स्वप्नवत हो भ्रांतियॉ , जिसके बोधोदय से, उस सुखरूपी शॉत, [...]

युग निर्माण करें सब मिलकर::– जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १३८)

युग निर्माण करें सब मिल कर, मानवताके पथ पर चलकर । परम [...]

प्रिये लेखनी , सखी — संगिनी :– जितेंद्रकमल आनंद ( पोस्ट १३७)

प्रिये लेखनी , सखी - संगिनी , तुमको सम्बोधन क्या -- क्या दूँ [...]

नीरसमें भी रसमिलता है :– जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट१३६)

भले लगे प्रतिकूल सत्य यह , नीरस में भी रस मिलता है माना साथ [...]

१३५ : अंतस जब दर्पण बन धुँधलाता यादों को — जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट१३५)

अंतस जब| दर्पण बन धुँधलाता यादों को । विरहाकुलनयनों से नीर [...]

मुक्तक: हर सुबह एक नई आस लिए होती है:- जितेंद्रकमलआनंद( १३२)

मुक्तक ::--- ------++ हर सुबह एक नई आस लिए होती है दोपहर एक अमिट [...]

ओंकार, अघनाशक,परम आनंद हैं जो: जितेंद्र कमल आनंद ( १३१)

ओंकार, अघनाशक ,परम आनंद हैं जो , क्यों न करें भक्त यशगान आठों [...]

काव्य से अमृत झरे,वेदका वह सार दें:- जितेंद्र कमल आनंद ( पो १३०)

सरस्वती -- वंदना ----------------------- काव्यसे अमृत झरे, वेद का वह सार [...]

जो पिता से प्यार करतीं वो हमारी वेटियॉ: जितेंद्र कमल आनंद ( पो १२९)

गीत ------- जो पिता से प्यार करतीं, वो हमारी वेटियॉ हैं । सूर्यको [...]

भक्ति- योग से राज- शक्ति का जब हो भण्डारन बाला ( पोस्ट १२८)

मुक्तक :: भक्ति-- योग से राज - शक्ति का जब हो भण्डारन , बाला! असुर [...]

समय बदलते सूखी धरती मुस्काती :: जितेंद्र कमल आनंद

मुक्तक ( पोस्ट १२७) ----------------------- समय बदलते सूखी धरती मुस्काती [...]

घूँट सुरा का तीखा होता प्यालों में : जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१२६)

घूँट सुरा का तीखा होता प्यालों में माना ,बाला ! यात्रा शभ हो [...]