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Author: जगदीश लववंशी

जगदीश लववंशी
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Total Views 648
J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) & MSC (MATHS) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और तारे सभी को कविता में ही खोजना तब मन में असीम शांति का अनुभव होता हैं"

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

विचारो की तरंग

मन में उठती विचाराे की तरंग, वाे भरते जीवन पथ में नया रंग, हर [...]

बदलता गांव

कहां है गांव की वाे मिट्टी, कहां हैं बचपन की कट्टी, कितना बदल [...]

पचमढ़ी के मेले

पचमढ़ी का है यह मेला, कर्तव्य पथ की यह बेला, पर्वत पर्वत पर हम [...]

भरत की व्यथा

आ जाओ मेरे राम भैया, बहुत याद आती रोती मैया, सूनी राहे, सूनी [...]

प्रणाम

प्रथम गुरु को प्रणाम, जिसने जन्म दिया, अपने सुख को [...]

धरा रही कब से पुकार

ओ आसमान के स्वामी देख जरा, कैसी मच रही उथल पुथल देख धरा, धरती [...]

भौर हुई

. उठ जाओ अब भाैर हुई, आंखे खाेलाे द्वार खड़ी परछाई, पक्षी सब [...]

कहाँ गई मानवता

. लाेग गाेरे मन काला, काम करें ये काला, भूल चले अपनी कला, माेह [...]

शरद्वान

बचपन जिसका बाणाे संग हुआ, बाणाे मे ही बीता, शरद्वान नाम उसका [...]

एकलव्य

उस वीर की याेग्यता काे निखरने से पहले राेंद दिया, जाति की [...]

मेरी नानी

मेरी अच्छी नानी, सुनाओ न कहानी, इन्ही बाताे में गुजरा मेरा [...]

भारत भूमि

हर जन्म में मिले तुम्हारा दर्शन, है भारत भूमि तुझको नमन, यहाँ [...]

मैं हूँ एक किसान

मैं हूँ एक किसान, मेरे भी हैं अरमान, मैं माटी को पूजता, खेतों [...]

मन मत हो उदास

मन मत हो इतना उदास, समय नहीं किसी का दास, आज बीत कर बन जाएगा [...]

महाकाल दर्शन

आये कर शिप्रा स्नान, किया प्रभू का गुणगान, दर्शन के लिये हम [...]

हरियाली

चाँद तारे और गगन, फूल खुशबू और पवन, गा रहे मिलकर गीत, कितनी [...]

लवण असुर

मधु सुत लवण था एक भयंकर असुर, ऋषि मुनियों को सताता डरते थे [...]

माटी सुत

हम बैठे लगाकर उनकी आस, मन में बसा है एक विश्वास, ताक रहे हम [...]

परोपकार

दिशा दिशा से यही पुकार, सबसे ऊपर है परोपकार, करते भला तो होता [...]

प्रेरणा

तुम हो जीने की प्रेरणा, देती हो एक नई प्रेरणा, जब से मिला [...]

पिता

पिता के चरणो में यह शीश नमन, करता हूँ बार बार उनका वंदन, धरा का [...]

सड़क किनारे

हम भी पड़े थे, कभी सड़क किनारे, माँ करती थी मजदूरी, सड़क [...]

लगाएंगे पेड़ एक

बर्षो बाद आज हमने यह देखा, सूख रहे तालाब देख रहे मेघा, कट रहे [...]

परशुराम एक आवेश

सप्त चिरंजीवाे मे से एक नाम, भगवान का आवेश अवतार राम, शिव ने [...]

मेरी माला

मेरी यादों मे आती एक सुंदर बाला । भादौ की रात का वह बरसाती [...]

मिले बड़ो का आशीष

जब हम छूते बड़ो के चरण, वही हैं हमारा सच्चा आचरण, जब मिलता हमे [...]

तुम आ जाओ

कब होंगे मन के खेत हरे, कैसे अब विरह के घाव भरे, कब सुनाई देंगे [...]

उठ जाओ मेरे लाल

उठ जाओ मेरे लाल, रवि भी हो गया लाल, आ गए तेरे सखा बाल, उठ जाओ [...]

वो याद हैं आज भी

सुबह सुबह घूमा करता हूँ, शायद मिल जाये वाे, आज भी । गलियाे में [...]

काली निशा

कैसी है निशा तेरी नम्रता , कैसी है निशा तेरी विनम्रता, मैंने [...]