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Author: जगदीश लववंशी

जगदीश लववंशी
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

स्मृतियाँ

लिखना नहीं मेरा शौक, जागना नहीं नींद रोक, मन में होती है [...]

कृष्ण भाग 1

वो हैं यादवो के सिरमौर, धारण करते मुकुट मौर, जब बनते धर्म [...]

नशा

नशा नाश की निशानी, नित्य निशा नशेड़ी नचता, नर नोचता नर, नर [...]

निशा

रोज आती हैं निशा, लेकर नया नशा, रोज जाती हैं निशा, देकर नई [...]

गुरु की महिमा

गुरु सेवा अति महान, ज्ञान देते सारा जीवन, भटको को दिखाते [...]

प्रेयसी

कितना अच्छा हैं तुम्हारा चरित्र, मन से नहीं मिटता तुम्हारा [...]

मेरी माँ

माँ वह शब्द हैं, जिसके आगे सभी शब्द, निःशब्द हैं । शब्द भी कम [...]

बदलाव

पहर पहर बीता जाए, जहर जहर घुलता जाए, हो रही प्रदूषित [...]

गांधार सुता

गांधार सुता गांधारी, अपनी किस्मत से हारी, भीष्म ने गांधार को [...]

बारिश

क्याे इस बरस, रही हाे इतनी बरस, बहुत हुआ,बरसकर अब मत बरस, नही [...]

श्री राम

अधर्म को मिटाने, धर्म को बढ़ाने,धरा पर राम आये, रघुकुल के नायक, [...]

मन

व्यथित हो रहा हैं मन, विश्रान्त नही हैं तन, फैला कैसा यह [...]

नव वर्ष

।।। अग्रिम बधाइयाँ, सबका हो शुभ नव वर्ष ।।। जब आम में आये [...]

जिंदगी

जिंदगी धूप भी हैं, जिंदगी छावं भी हैं, खुशियों का मेला [...]

किताब

वह मेरी किताब हैं, वह मेरा ख़िताब हैं, वह सबसे निराली हैं, वह [...]

बचपन की होली

कहाँ हैं बचपन की वो होली, साथ खेलने वाली हमजोली, उछल कूद [...]

रंग

गली में शोर हैं, रंगीन हर छोर हैं, नया एक दौर हैं, खिल उठा भौर [...]

जीवन

कैसा है यह जीवन, कितने है यहाँ बंधन, उलझे है यहाँ रिश्ते, सुख [...]

साथ चले

हम चले, साथ चले, नेकी कर,दरिया पार चले, हाैसला है इतना, कि गगन [...]

घटोत्कच

चलता हूँ आज रण मे, दिखलाता हूँ अपना काैशल, कैसे मारा मेरे अनुज [...]

सात्यिकी

अर्जुन का है शिष्य वाे, कृष्ण का है दुलारा [...]

कौरव सभा

था सभा मे सन्नाटा, सब थे खड़े माैन, आकर नारी की बचाये लाज [...]

अभिमन्यु

सत्य की पताका अब पहरायेगी, अधर्मियाे का नाश हाेगा, धर्म की जय [...]

माटी

अपना देश, अपनी माटी, अपनी धरा और घाटी, आती है याद सात समुदंर [...]

दुनियां

दुनिया है एक छलनी, कब काैन किसे छल जाये, प्यार है बड़ा अनमोल, [...]

बेटियां

मंदिर मस्जिद टेका माथा, कर मिन्नतें सबको साधा, तब….. एक छोटी [...]

हिंदी….

वतन पुकारता है हिन्दी हिन्दी, हिन्दुस्तान के माथे की [...]

बलराम

द्वापर में जब पाप बड़ा, धरा पर भारी, आये शेष नाग ,रख रूप मनुष्य [...]

बेटियां

मंदिर मस्जिद टेका माथा, कर मिन्नतें सबको साधा, तब..... एक छोटी [...]