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Author: अनिल कुमार मिश्र

अनिल कुमार मिश्र
Posts 17
Total Views 262
अनिल कुमार मिश्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित काव्य संकलन'अब दिल्ली में डर लगता है'(अमेज़न,फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध) अशोक अंचल स्मृति सम्मान 2010 लगभग 20 वर्षों से शिक्षण एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन सम्प्रति प्राचार्य,सी बी एस ई स्कूल निरंतर मुक्त लेखन आपके स्नेह का पात्र संपर्क-9576729809 itsanil76@gmail.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

आवाज़ दिल की

छोटी सी है सचमुच मगर यह बात दिल की है संभल जाओ ऐ हठधर्मियों [...]

मर्यादा

अब कहाँ हैं बुद्ध गौतम तम ही तम सर्वत्र है अन्याय की बंशी [...]

माँ

"मदर्स डे"-सुनने में अच्छा लगता है,आधुनिकता प्रमाणित होती है [...]

साँस

जी तो करता है बस चला जाऊँ छोड़कर सब कुछ इसी क्षण पर तेरे [...]

नेह

नेह *** मनुज!तेरे ह्रदय में नेह का दीपक नहीं जलता है क्यूँ [...]

गिरगिट

इस रंगीन जगत से गिरगिट तुम बाहर आ जाओ आज रंग बदलना बंद करो [...]

ज़िंदगी

जब कभी यह ज़िन्दगी बेचैन सी होने लगे करुण रस में हास्य रस का [...]

आवाज़

इन साँसों की छटपट बेचैनी को जगत् में कौन समझा है,बताओ ह्रदय [...]

बाजार

महानगर के व्यस्त,बेचैन,छटपटाते बाजार में ज़िंदगी [...]

प्रेम

रेत सी बंज़र ज़मीं पर,प्रेम का पौधा कहो कैसे लगाऊँ ढूँढूँ कहाँ [...]

ज़िंदगी

ज़िंदगी!तुम कब तक रहोगी बनकर पहेली इस ह्रदय में बोल भी [...]

माँ

माँ!तेरा स्नेह मिले प्रतिपल जीवन को आलोकित कर दो मानव सच्चा [...]

मुक्तक

लोग अपने ही मिले हर राह पर बन सके मेरे नहीं अपने कभी सब दूसरे [...]

गीत

मत ह्रदय से गीत गाओ आज तुम रहने भी दो मौन मन की बात मत दिल में [...]

बेटी

बेटी है आधार जगत का बेटी से है सार जगत का बेटी देवी,बेटी [...]

दीप मुझको बना दो ना

मुझको दीपक बना दो ना मैं तेरे अँधेरे कमरे में यूँ ही जलता [...]

हाथ धर दो

मौन मन में बात कुछ आती नहीं बस तुम मेरे हाथों में अपना हाथ धर [...]