साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Bikash Baruah

Bikash Baruah
Posts 46
Total Views 242
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

निडर बन

तू उठ मेरे भाई निडर बन,कर लड़ाई, रोक न ले कदम तू तेरे हाथो है [...]

नाउम्मीदि

क्या पाया कुछ भी तो नही क्या खोया कुछ भी तो नही, जिन्दगी गुजर [...]

आशा और कोशिश

आशा की उड़ान सभी भरते है मगर हर कोई मंजिल तक पहुंचते नहीं, रह [...]

त्रिरंगा

बहुत धुम मची है आज बाजारों में त्रिरंगे वीक रही है ऊँची [...]

फूल

दामन में काँटे लिए खिलते और मुस्कुराते, सबक जिंदगी का हमें [...]

वह बूढ़ी

मैं बस में बैठा था । अचानक कुछ लोग एक बूढ़ी को पकड़कर बस में [...]

एक सबक

तुम भयभीत न होना मेरे दोस्त काली बादलों के छाने से, [...]

एक सपना

एक सपना देखा था उन्होंने देश को राम राज्य बनाने का, पर सपना [...]

भूल बैठे हैं

जाने क्या माजरा हैं क्यों लड़ाई की बातें सभी कर रहे हैं, [...]

क्या चाहता है कवि ?

क्या चाहता है कवि ? कि बहुत कुछ चाहते है कवि, जब भी मंच पर खड़े [...]

हौसला

पतझड़ बेशक कुम्हला सकती है फूलों को, मगर गुलशन पुरी तरह उजड़ [...]

वर्तमान

यांत्रिक युग के लोग हम, दिमाग ज्यादा दिल है कम; बटन दबाकर सब [...]

दोस्ती

दोस्ती इबादत की तरह दोस्त खुदा की तरह मिलना मुश्किल दोनो ही [...]

वजूद

जब कभी कुछ सोचा चाहा कुछ करने को, लाखों अर्चनें खड़े हुए पथ [...]

आओ विद्रोह शुरु करें

आओ विद्रोह शुरू करें उन देशवासियों के खिलाफ, जिन्हें नाज [...]

खानाबदोश

आसमान में उड़ते परिंदों की तरह इस जगह से उस जगह आशाओं की [...]

मन

मन शांत रहे कैसे जब देखूं अशांत जन जीवन, मरघट बन चुका यह [...]

क्षुधा

रात का वक्त,रास्ता एकदम सुनसान था। आकाश को छूती स्ट्रीट [...]

ओस की बुन्दे

सितारों की है चमक मोती सा है लगता मोल नहीं कोई अनमोल है [...]

कुर्सी

चार पैरों की बनी हुई एक निर्जीव वस्तु, जो देखने में अति [...]

चौबीस मार्च, 2004 की चोरी

अखबार में आई है खबर किसीने चोरी की है गुरुदेव की नोबेल [...]

ताजमहल

कब्र पर महल बनाकर भी कोई किसी की जान बचा नही सकता, कुदरत का [...]

अगरबत्ती

बदन पर शोला दहकाति जलकर फना हो जाती, फिर भी जूबाँ से कभी उफ [...]

मेरा प्यारा असम

चारो ओर है हरियाली छाई जहाँ पहाड़ों से निर्झर बहती तरह तरह के [...]

दोराहे

श्मशान और कब्रिस्तान के दोराहे में खड़ा हुँ मैं कन्धो पर [...]

मुस्कुराहट

ठंड में कंबल ओढ़े सड़क पर बैठे हैं न छत न दीवार ना ही तन को [...]

पहाड़

आँखे खूली है फिर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा चारों तरफ है [...]

मौत

हर गली कूचे में सड़क पर या किनारे बंगलों या मकानों में बहुत [...]

खाली-खाली

सब कुछ है खाली-खाली, खाली मकान खाली घर खाली मन खाली शरीर [...]

देशप्रेम

प्रेम देश से करते गर देश की हालत न होती ऐसी झूठी भक्ति झूठा [...]