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Author: guru saxena

guru saxena
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

श्राद्ध पक्ष

श्राद्ध पक्ष घनाक्षरी छंद कभी नहीं जाना हाल जरा ना किया [...]

हिन्दुस्तान है

हिंदुस्तान है (घनाक्षरी छंद) गुरूजी ने कहा एक शब्द के अनेक [...]

भ्रष्ट नेता चतुर नायिका

भ्रष्ट नेता चतुर नायिका रूपक,उपमा अलंकार, घनाक्षरी [...]

गणेश बाल लीला

बाल गणेश लीला(हास्य) बालक गणेश बोले माता तुम कहती हो पिताजी [...]

बाल गणेश लीला (हास्य)

बाल गणेश लीला(हास्य) बालक गणेश बोले माता तुम कहती हो पिताजी [...]

मन और आत्मा

आत्मा ने कहा परमात्मा में ध्यान लगा मनचाहे और थोड़ा सा [...]

हे राम

हे राम साधू सन्यासी वा बाबा त्यागी तपसी तीर्थ समान दर्शन कर [...]

खुद फूंक रहे हैं

खुद फूंक रहे हैं घनाक्षरी छंद काट काट रेल की पटरियां उखाड़ [...]

एक संतान शेर समान

(एक संतान शेर समान" परिवार नियोजन के इस नारे पर एक छंद) हवा [...]

राम रहीम

बाबा राम रहीम (घनाक्षरी छंद समान भाव) राम व रहीम में नहीं है [...]

पैरोडी

बाबा राम रहीम के उद्गार (फिल्मी तर्ज पर एक गीत) जज ने जरा रहम [...]

ब्रज की रज

सवैया (ब्रज की रज) ब्रज के वन बाग तड़ाग हैं धन्य जहाँ जन्मे [...]

रानी अवंती बाई

रानी अवंतीबाई को श्रद्धांजलि दुर्गा जैसी उतरी रण में रखा [...]

अनुमान प्रमाण

घनाक्षरी छंद अनुमान प्रमाण अलंकार संभव है किसी दिन ऐसी कोई [...]

वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम् यह दिन शहीदों के बलिदान का यह दिन भारत के [...]

तिरंगा

तिरंगा, सवैया छंद दे रहे लोग सलामी तुझे यह पाकर पर्व महान [...]

तिरंगा

तिरंगा आपस में मतभेद विचारों का देते [...]

सिचवेशन कविता

वर्षा की फुहार :-सिचुवेशन-: एक नायिका बारिश में भीग रही है उसे [...]

सिचवेशन कविता

वर्षा की फुहार :-सिचुवेशन-: एक नायिका बारिश में भीग रही है उसे [...]

कलाम साहब को समर्पित

सादगी सहजता सरलता से भरे हुए मानवतावादी गुण धर्म धारे धाम [...]

कृपान घनाक्षरी

कृपान घनाक्षरी बैरी आज सीना तान करे जंग का ऐलान, ओ सपूतो [...]

कारगिल विजय दिवस पर

पाकियों को पकड़ पकड़ पीस डाला ऐसे जैसे कोई चटनी सी पीस डालें [...]

जरा बतिया ले

सवैया छंद आदमी कि नहिं गैस मिटे चहे बीस प्रकार की औषधि खा ले [...]

हिमालय

कुंदलता सवैया ( 8 सगण 2 लघु) चलते नित हैं सत् के पथ में, फिर हो [...]

घूमें कभी मन में घने

घूमें कभी मन में घने क्षण क्षण यही विचार किस किस पर कविता [...]

नेता जी और यमराज

एक नेता जाके यमराज की अदालत में, अड़ गया बोला मुझे स्वर्ग [...]

कुन्डलिया

सब प्रकार से सफल है, मोदी जी का राज अन्न सड़ा गोदाम में, फिकी [...]

कवी मंच वालो

व्यंग्य विनोद कवी मंच वालो कवी मंच वालो यहां मैं जमाऊं वहां [...]

मनहरण दंडक छंद (सैनिकों से निवेदन)

पाक की मिटाने धाक,आगे बढ़ो काटो नाक, मारो शाक पर शाक नहीं [...]

भाषा समक अलंकार

राम के अनेक नाम, राम के अनेक धाम, राम के अनेक काम, सेंट परसेंट [...]