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Author: रवि रंजन गोस्वामी

रवि रंजन गोस्वामी
Posts 34
Total Views 288

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

श्री राम (प्रार्थना )

इस अंतस की पीड़ा को, कौन सुनेगा ? राम । जीवन के इस खालीपन को [...]

दायरे

अपने दायरे हमने खुद बनाये कुछ हालात ने मजबूर किया , कुछ हम [...]

माना जायेगा

न भागना ,न कोई बहाना काम आयेगा । मुश्किलों से सिर्फ टकराना [...]

अशीर्षक

कुछ मेरे पास हो जो दे सकूँ मैं , अना कम हो तो कुछ ले सकूँ मैं । [...]

लाश

लाश का चेहरा पुरसुकून था । उस पर गज़ब का नूर था । लगता था नाच [...]

कुछ लोगों से पूंछो तो …(व्यंग )

सच जो भी हो । कुछ लोगों से पूंछों तो - ---------- क्या हुआ ? ईवीएम में [...]

परिंदा

अभी दिन है तो,रात भी जरूर आयेगी । चाँद तारों से, मुलाक़ात भी हो [...]

जिंदा रहते हैं कमाल करते हैं

छोड़िये ये बेकरारी, बेसबब , लोग चिल्लाते हैं बेमतलब, जिंदा [...]

विवाद

उन्हें विवाद पसंद है हम संवाद करते है । वे शब्दों को पकड़ते [...]

क्या देखूँ

कहीं गुजरे वक्त के निशां देखूँ । कहीं जाते हुए लम्हों के [...]

मिलन का डर

किसे खोजता है मन किसकी तलाश है । ऐसा क्यों लगता है , कि वो [...]

काम करने दो

ये कमी है , वो कमी है , ऐसा कैसे होगा ? वैसा कैसे होगा ? ऐसा हो [...]

मसीहाई

मुझे नजरअंदाज़ करता है । मुझ पर नज़र भी रखता है । मैं बेशर्मी [...]

खामोश तस्वीर

कहीं बरसे बादल । कहीं बरसे नयन । बारिश से धुले मौसम । आसुओं [...]

कौन सुने !

सब ही अपनी कहते हैं यहाँ। कोई किसी को नहीं सुनता। आवाज दब [...]

जश्न

आओ आज रात जश्न मनायें। हम जागें , साकी को जगाएं पैमाने फिर [...]

कतार

लोग कतार में है और वे समझते हैं कि वे क्यों कतार में है । कुछ [...]

बड़े शायर -व्यंग

वे बड़े शायर हैं । ऐसा समझते हैं । सब उन्हें दाद दें । ये [...]

इंतजार

मेरी आवारगी के हमसाये वीरानों में मुझे छोड़ गये । कोई उसको [...]

सर्जिकल स्ट्राइक

दलाल को दलाली दिखी झूठे ने मांगा सबूत । उनकी माँ शर्मिंदा [...]

सोकर तो जीने देते

क्यों जगाया तुमने ? कुछ और सोने देते । जो ख्वाब देखता था [...]

अब भुगतो (पाक को संदेश )

कहा था हमसे मत उलझो । अब भुगतो । सब्र का प्याला छलक गया । अब [...]

जागरूक !

वे जागरूक हैं । अधिकारों के लिये । खूब लड़ते हैं । धरना [...]

पीठ पर वार

बहादुर दुश्मन हो तो पीठ न दिखाओ कायरता होगी । कायर दुश्मन [...]

बेमौसम

वे तस्वीरें खींचते हैं मिटा देते हैं, मुझसे एक तस्वीर [...]

लौट न जाये !

खोल दो हृदय कपाट निर्भय , देखो तो कौन आया है ? कहीं वह लौट न [...]

विडम्बना

मैं साँस ले रहा हूँ , सूंघ रहा हूँ निर्वात l कड़ी धूप में देख [...]

मंकी -बंदर

सर्दी की एक दोपहर की गुनगुनी धूप में बंदरों का एक समूह पप्पू [...]

समस्या

उन्हें मालूम है - अपने इंतज़ार की तड़प और - मेरा न आना । मुझे [...]

खफा

दुश्मनों की बात मत पूंछों , दोस्त भी बर्दाश्त नहीं होते । न [...]