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Author: gopal pathak

gopal pathak
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मै साहित्य का अदना सा कलमकार हूँ माँ शारदे की कृपा से थोडा बहुत लिख लेता हूँ /मै ज्यादातर श्रंगार पर लिखता हूँ/और वीर लिखता हूँ/

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

प्यार की कहानी

खुला छोड़ा है जिनको दरवाजा अन्दर वो अभी तक आये नहीं हैं हमने [...]

हम जैसे शायद दिवाने नहीं है

खुला छोड़ा था जिनको दरवाजा अन्दर वो अभी तक आये नहीं है हमने तो [...]

लिखते रहते है

गुल तो गुलशन में रोज खिलते रहेते है कभी नए तो कभी पुराने [...]