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Author: सत्य प्रकाश

सत्य प्रकाश
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अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है साहित्य l समाज के साथ साथ मन का भी दर्पण है l अपने विचार व्यक्त करने का प्रयास है l

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

वतन का सिपाही

प्रबुद्ध हो, आरूढ़ हो, हौसले मचान हैं तू वतन का पासवा, तू वतन [...]

होली आई

कलियों पे है योवन छाया, गोकुल की गलियाँ बोली झूम रहा है [...]

गधा दर्शन

इधर-उधर विचर रहे, घास थे वो चर रहे आदमी में भी गधे, गधे गधो से [...]

शेर

कुछ दर्द ऐसे भी है जिन्हें कोई बांट नहीं सकता दाँतविहीन [...]

अमर प्रेम

क्या खूब ये मेरी जिंदगानी हो जाए गर तू मेरी लिखी कहानी हो जाए [...]

गरीब

फटी है धोती फटी है पगडी उसके पास न धेला दमड़ी कपड़ों से भी [...]

तेरी कमी

कभी छत तो कभी दीवारें मयस्सर नहीं हुई मैं वो घरौंदा हूँ जो [...]

अनंत प्रतीक्षा

तुझे देखकर मैं जी रहा, मुझे देखकर तू जी रही जहर मै भी पी रहा, [...]

बुढ़ापे की व्यथा

बीता है मधुमास उम्र थमी, सब संगी साथी छूटे हैं नेह सिंचित [...]

कान्हा

दे दो दर्शन तरस रहा, आंखों से सावन बरस रहा श्याम मेरे कब आओगे, [...]

तेरी याद

ज़िन्दगी के मेले में भीड़ में अकेले में शहर में कि गांव में, [...]

बेटी की पुकार

कोख में बेटी करे पुकार, मुझे चाहिए माँ का प्यार मुझे दुनिया [...]

बेटी का खत

मैं तेरे आंगन की तुलसी मेरी आँखें बरस रही प्यार के मीठे बोलो [...]

बेटी का खत

मैं तेरे आंगन की तुलसी मेरी आँखें बरस रही प्यार के मीठे बोलो [...]

बच्चे

हम है छोटे छोटे बच्चे तन के कच्चे मन के सच्चे हमको किसी से बैर [...]

महफिल

सबने कायम कर लिए अपने अपने मकां यारों की महफिल सजे जमाना बीत [...]

आओ पेड़ लगाए

देखो ये क्या कहर हुआ जलवायु में जहर हुआ कटता जंगल मिटते [...]