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Author: DrMishr Sahaj

DrMishr Sahaj
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

गीतिका

गीतिका मात्रा भार-१० ००० कष्ट गलता नहीं. ग़म पिघलता [...]

मुक्तक:

आंधियों में उड़ गया था, आज वापस आ गाया हूं. साख से बिछडा हुआ था, [...]

गीतिका

होश में आकर के मुझसे बात कर। फितरत समझता हूँ न भीतर घात [...]

प्रश्न

प्रश्न रोटी -दाल का जान - माल का हक-हुकूक का तहज़ीब -सुलूक [...]

‘सहज के दोहे

अन्दर से बेशक हुआ, बिखरा - चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर [...]

‘सहज’ के दोहे

जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़. यह है दुर्लभ से मिला,समझ [...]

एक दोहा

अन्दर से बेशक हुआ,बिखरा- चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला [...]

बातें !सभी कर लेते हैं

छंद मुक्त रचना 000 बातें सभी कर लेते हैं बातों का असर सिर्फ [...]

एक ग़ज़ल के चन्द अस्सार

आजाद है वतन सही, आजाद हम नहीं। खाई गरीब -अमीर की, अब भी [...]

गीतिका

मापनी:2122 2222 2222 2 --------------------------- आज कल ख़ुद से मैं, नाराज रहा करता [...]

शब्द युग्म मुक्तक

मुक्तक शब्द युग्म-चमक/दमक मुक्तक 000 कहाँ लगे है चमक-दमक, [...]

जनक छंद में तेवरी

तेवरी काव्य जनक छंद में तेवरी –एक कोशिश [...]