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Author: Mahender Singh

Mahender Singh
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पेशे से चिकित्सक,B.A.M.S(आयुर्वेदाचार्य)

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“आत्म-निर्भरता और दुनिया”

कभी मैं भूल जाती हु कभी उन्हें याद रहता है, भूल-भलैया खेल में [...]

“सफलता और आस्तिकता में कोई संबंध नहीं”

सफलता का श्रेय किसी एक खुशनसीब को मिलता है, असफलता के लिए हर [...]

*”काव्य और अनुभूति”*

*"*बहने लगी रसधार दिलों में, जाने उद् -भीत ..है कहां से, बस जाता [...]

*”कौआ कनागत् और सीख “*

आओ..आओ.. आओ..कागा, आयो..कनागत्..मांड़ी ..काढ़ी, पितृ.. पिण्ड.. जिम्मा.. [...]

*”बेचैन इंसान और विवेक”*

**इंसान तेरी बेचैनी की वजह क्या है ? कुछ खो गया है या व्यर्थ ही [...]

*नफरत का मूल कारण कूटनीति*

मिर्च मसाला बिखरा पड़ा, जो चाहे जैसी सब्जी,व्यंजन ले [...]

हास्य *लेख *”पगडण्डी पर बने स्लोप”*

एक रात रास्ते से ..गुजरते हुए, मुश्किल में ..जान पड़ गई, मोहल्ला [...]

*जीव का अपना अस्तित्व है जीवन*

**खुले आसमां में उड़ता ..हुआ परिंदा हु** पानी में तैरता हुआ खाली [...]

**भौतिकता के आधार से सतयुगी प्रयास**

ये कैसी विडंबना इस भौतिक-युग से आरंभ हुई, जो बढ़ना चाहिए [...]

*मेरे अल्फाज़ तुम्हारे है*

**मेरे अल्फाज़ ....तुम्हारे हैं, बस कहने को ..अंदाज मेरे ..अपने [...]

*दोहे और भक्ति-आंदोलन*

1. ममता उतनी ही भली,जासे उपजे ध्यान, उस सहयोग का कौन मूल्य,जो [...]

*वर्ण का महाजाल और संतुष्टि*

**ये सपने नहीं हकीकत है, चुकती जिसमें कीमत है, ख्वाब नहीं .. ..जो [...]

महाकवि,जगत् मसीहा मार्ग-दर्शक*बाबा साहब*

*आदर्श-युक्ति* जिम्मेदारियों में नहीं है बोझ इतना, जितना [...]

“एक शेर दूसरा सवा शेर”

**शेर :- तप रहा है सूरज पर "अ इंसान" तेरे मिजाज से ज्यादा गर्म [...]

एक यह भी उपाय, जो विक्षिप्तता से बचाता है,

एक यह भी उपाय, जो विक्षिप्त मन से...बचाव करता है, मन उदास है [...]

**अपना प्रकाश स्वयं बनो**

**अपना प्रकाश स्वयं बनो** निशाने पर होते है लोग,किससे कब गलती [...]

😊”सत्ता और रसोई”का”व्यंग्यात्मक संबंध”👌

"रसोई और सत्ता"का"व्यंग्यात्मक संबंध" प्याज ने हमसे दिल्ली [...]

“हौसले ही प्रेरणा बनते है,शिकायतें नहीं”

आओ उड़ान भरें, . चढ़ जाए गर परवान पंख, . सूरज को क्यों ? बदनाम [...]

*”जवाब का उपनाम है जिंदगी”*

जवाब है तो जिंदगी सहज है, वरन् विरान है जिंदगी, एक तरफ [...]

“जीव,जीवन और स्वभाव धरा तेरे संस्कार”

गर व्यर्थ और समर्थ में पहचान नहीं हमारी है..तो ..होगा ही [...]

“एक ऐसा सच जिसका आधार ही महाझूठ”

एक ऐसा सच जिसका आधार ही महाझूठ 1. कब हुआ फैसला दो लड़ने वालों [...]

*गुरु एक भ्रांत शब्द*अंतस चेतना ही गुरु*

जीवन-उर्जा है गुरु, जहां फैले ... वही उजियारा, जीवन ही परम [...]

*आप्त वचन और सत्य*

असत्य का सत्य पर, बुराई का अच्छाई पर, हार का जीत पर सबल का [...]

समर्थ से श्रृंगार.. व्यर्थ को वनवास… सही कदम

1. नूर खिले है जैसे किताबों पर जिल्द चढ़े है, सजावट कंगूरे की [...]

*हर बार भूखे ही कुचले जाते है*

हर बार भूखे ही कुचले जाते है, भूख का अर्श ..... बना हुआ समाज में [...]

“एक कदम भगवता की ओर”

लोग वर्षों से एक ही सवाल पूछते आ रहे है .... कि आपकी बिरादरी [...]

कुछ की चाहत

सीमित की चाह में ..सीमित ही रह गए, वरन् सब चाहने वाले ..अपने ही [...]

सोच सम्मोहन और हकीकत

जिनकी सोच प्राकृतिक नहीं होती है, वे सदा से यही सोचते आएं [...]

साध और संगत…..खुद की भली,

परिणाम चाहिए, सम्मोहन से बचे, स्वावलंबी बने, स्वतंत्रता की [...]

सीसे के हैं घर/दामन पर,फिर भी दाग

पहरे भी, गहरे भी, नभ के नीचे, धरातल पर, हर जीवंत की नज़र [...]