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Author: Mahender Singh

Mahender Singh
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पेशे से चिकित्सक,B.A.M.S(आयुर्वेदाचार्य)

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कविता (56 Posts)


विज्ञान वरदान या अभिशाप बिन सैंस तोले कौन,

**सैंस(sense)से जो आई है, सुविधा बहुत बढ़ाई है, उसी [...]

“माँ गुणों की खान”

**माँ फूली नहीं समाती, जब कोई बच्चा प्यार से, सिर्फ माँ भर बोल [...]

“श्रीकृष्ण-लीला” और “प्रकृति-संरक्षण”

अपना भी मन तो बहुत करता है, पेड़ कदम पर बैठ बंशी बजाने [...]

पर-पीड़ा सिखाने आती है

**जब पीर पराई हो, वैसे घूमती आई हो, विचलित नहीं होता [...]

इंसानियत सदियों का सम्मोहन तोड़ सकती है,

**न जाने इंसानियत कब ? हिंदू, मुस्लिम, सिख,ईसाइयत से बाहर [...]

आस्तिक कौन ?लोगों पर एक नज़र,

हररोज रोज की तरह रोज़ लेकर पहुँचा मंदिर में लोगों ने आस्तिक [...]

हँसी, मजाक और व्यंग्य मौसेरे भाई

***कुछ लोग भावनाओं से, .....रहते है भरे हुए, . एक दिन कुछ लोग जा रहे [...]

भावनाएं नाजुक होती हैं,

वो मुझे रोकती रही, और मैं आगे बढ़ गया, वो मेरा जुनून था, उसको [...]

हास्य-कविता:- हास्य भी ..सीख भी

हे प्रभु ! उन्हें बहुत सारे पटाखे दे देना, जिन्होंने हमसे [...]

समस्या साधारण,फिर भी समाधान नहीं,

एक आम समस्या, जो कि साधारण नहीं है, इसलिए समाधान भी नहीं [...]

जैसा मनोभाव.. वैसी ही दुनिया

किसी के वास्ते ..अमीरों की है दुनिया, जो करीबी है "रिश्तों की [...]

बिल्कुल भी ना डरे,

निजता प्रस्तुत करे, बिल्कुल भी ना डरे, सभी काम सोच-समझ कर [...]

जैसी चाहत वैसे फल

**हम यूँ ही शरमाते रहे, लोगों को अपना समझकर, लोगों ने अपनाया ही [...]

“अनुभव से काम लें”

**ध्येय क्या बनाएँ संतुष्टि साधन है , घर क्या माँगे, आसमां छत [...]

कौन सी सोच हमें उभार सकती है,

प्रतिष्ठा की ..चाह में, स्वाभिमान को बहुत बड़ा स्थान है, "नारद" [...]

*हम खुद ही अपने दुश्मन क्यों है*

😊ये तो शायद ठीक से मालूम नहीं, कि हम खाना ....क्यों खाते है ? पर [...]

“माँ तुम कैसी हो ?माँ के लिए खुशी अपार”

माँ तुम कैसी हो ? माँ फूली नहीं समाई, माँ बोली ..आ गया मेरा बेटा [...]

“बदलाव व्यक्तित्व और समाज”

बदलाव में पीड़ा तो बहुत है, बेहतर है ...फिर भी बदले, वैसे भी तो [...]

स्वतंत्र भावना से देखो-जीव के निज-धर्म,

पाखंड को विराम, निज-धर्म को सलाम, परोसा जाता है मांस और [...]

धर्म प्रेम-प्रवाह है,आइना है,कोई तस्वीर नहीं,

धर्म कोई लकीरें नहीं, स्वभाव है, सहज है, सतत है, प्रवाह [...]

“कल्पना ,आयोजन और प्राप्ति “

भक्त की अपनी कल्पना, वक्त के साथ उलझ जाती है, साँप तो निकल [...]

तत्व-बोध और जागरण

''तत्व-बोध से जागरण" 💐💐💐 क्या है ये सब ? पूछे सबका रब, एक [...]

अभ्यास ही सफलता की कुंजी

बहुत पढ़ी है कथा कहानियां, कुछ भी तो हाथ नहीं आया, सिर्फ अनुभव [...]

“पुलकित पुष्प सम हो जीवन”

💐💐💐 ये 💐 पुष्प एक संदेश एक अहसास यही पैगाम एक आगाज, एक [...]

सत्य छुपा है,प्रकट होता है,हौसला वा जुनून चाहिए

***सत्य छुपा है, झूठ के मजबूत खोल में, हौसला और जुनून [...]

*” जिओ और जीने दो “*

*"जिओ और जीने दो"* आखिर कब तक मातम मनाते रहोगे, गाड़ी चलाते हुए [...]

*”समाज निजता में बाधक है”*

मैं कह न सका, हिचक मेरे मन में थी, वह सह न सकी, काफ़िर कह आगे बढ़ [...]

“आत्म-निर्भरता और दुनिया”

कभी मैं भूल जाती हु कभी उन्हें याद रहता है, भूल-भलैया खेल में [...]

“सफलता और आस्तिकता में कोई संबंध नहीं”

सफलता का श्रेय किसी एक खुशनसीब को मिलता है, असफलता के लिए हर [...]

*”काव्य और अनुभूति”*

*"*बहने लगी रसधार दिलों में, जाने उद् -भीत ..है कहां से, बस जाता [...]