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Author: डॉ. हीरालाल प्रजापति

डॉ. हीरालाल प्रजापति
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

होली मुक्तक : मुझे चुमकार होली में ॥

रहूँगा मैं नहीं तैयार खाने मार होली में ॥ लगा फटकार निसदिन [...]

मुक्त-ग़ज़ल : पूछना तुम तीन होली में ॥

उसका मन इस बार हम बन दीन होली में ॥ दान ले लेंगे या लेंगे छीन [...]

*मुक्त-ग़ज़ल : दिल लगाने चल पड़ा हूँ मैं ॥

हथेली पर ही सरसों को जमाने चल पड़ा हूँ मैं ॥ कि बिन पिघलाए [...]

*मुक्त-ग़ज़ल : रावण भी रहता है मुझमें !!

तू क्या जाने क्या है मुझमें ? सिंह है या चूहा है मुझमें !! इत [...]

*मुक्त-मुक्तक

जब मुझको ज़रूरत थी तेरी दैया रे दैया ! उस वक़्त तो कुछ और ही था [...]

*हाइकु-माला

============ तन से काली ॥ पर हिय से वह - शुभ्र दिवाली ॥ ============ मेरी [...]

गीत : प्रेम धुन में प्रीत लय में

प्रेम धुन में प्रीत लय में गुनगुनाएगी ॥ लेखनी मेरी उसी के [...]

गीत : तुम क्या जानो दुख पायल का ?

तुम क्या जानो दुख पायल का , तुमको तो छन – छन से मतलब ? चूड़ी [...]