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Author: डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

काव्य रो रहा है

काव्य रो रहा है *** साहित्य में रस छंद अलंकारो का कलात्मक [...]

ढलता रहता हूँ

ढलता रहता हूँ *** हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ ! बनके दिया सा, [...]

रोमांच

रोमांच बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की [...]

गाथा एक वीर की

रचना के पूर्ण रसास्वादन के लिए कृपया पूरा पढ़े ...! गाथा एक वीर [...]

अदा

अदा +++++++++++++++ मुझसे मुहब्बत भी बेपनाह करता है फिर भी मेरी हर बात [...]

कैसे मुकर जाओगे — डी के निवातिया

यंहा के तो तुम बादशाह हो बड़े शान से गुजर जाओगे । ये तो बताओ [...]

मेरे घर को बाँट दिया

मेरे घर को बाँट दिया *** मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ [...]

माफ़ कर देना माँ — मातृ दिवस — माँ पर कविता — डी. के निवातिया

माफ़ कर देना माँ तुझे मातृ दिवस पर याद नहीं किया मैंने शायद [...]

फेल हो गया

फेल हो गया सत्तर साल वालो का तो ख़त्म खेल हो गया। छप्पन इंच का [...]

वो हमारे सर काटते रहे

वो हमारे सर काटते रहे हम उन्हें बस डांटते रहे !! वो पत्थरो से [...]

इश्क़ बला क्या है

इश्क़ बला क्या है ********************** तुमसे चाहत तो हमे भी बेपनाह [...]

मैं और तू

मैं और तू *** शीर्ष लोम से चरण नख तक एक तेरे ही नाम से बंधी हूँ [...]

कतराने लगे है लोग

कतराने लगे है लोग अब तो किसी को पानी पिलाने से भी कतराने [...]

मौसम गर्मी का

मौसम गर्मी का सूरज ने जब दिखलाई हेकड़ी तरबूज बोला फिर मुँह [...]

व्याकुल इंसान

व्याकुल इंसान दरखत झूमे, सरोवर तीर, निर्झर निर्झर बहे [...]

अलबेला हूँ

अलबेला हूँ ! भीड़ में खड़ा हूँ, फिर भी अकेला हूँ कदाचित इसीलिए [...]

रांझे की हीर

रांझे की हीर कल तक करते देखा था मुहब्बत कि खिलाफत जिनको। आज [...]

इरादे मजबूत रखना

इरादे मजबूत रखना *** नफरत करनी है अगर हमसे तो इरादे मजबूत [...]

बड़ा अच्छा लगता है

बड़ा अच्छा लगता है उगते सूरज की लालिमा को तकना बैलो के गले [...]

सत्ता कितनी प्यारी

सत्ता कितनी प्यारी मेरे देश के हुक्मरानो को सत्ता कितनी [...]

कोई नाराज नहीं चाहिये

कोई नाराज नहीं चाहिये कितने अमन पसंद लोग है यहाँ किसी को [...]

नवदुर्गा के नौ रूप स्तुति

नवदुर्गा के नौ रूप स्तुति शैलपुत्री शिखर वासिनी, त्रिशूल [...]

सच्चाई दिखलाता हूँ

नित्य कर्म की तरह सुबह कार्यशाला के लिए प्रस्थान करने से [...]

सुसंगति – दोहे

दोहे मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव ! कोइ कथन बने औषधि, कोइ [...]

मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई

ना पूछो यारो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई फ़ज़ीहत इसकी आजकल [...]

जगाने आया हूँ

न कोई हंगामा न कोई बवाल करने आया हूँ बिगड़े हुए हालातो से आगाह [...]

सेहरा — शेरो शायरी

लो सज गए वो फिर से पहनकर सेहरा भी, अरे कोई तो जाकर उन्हें [...]

रावण बदल के राम हो जायेंगे

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे। इस शहरे-ऐ-अमन में, [...]

मोहे प्रीत के रंग रंगना

रंग से नही रंगना, सजन मोहे अपने रंग में रंगना ! कच्चे रंग [...]

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ जग जननी हूँ, जग पालक हूँ मैं नारी हूँ, न किसी से [...]