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Author: Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir
Posts 80
Total Views 790
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

गज़ल/गीतिका (23 Posts)


*वफा का चलन*

चरागे-मुहब्बत बुझाना नहीं। हमें याद रखना भुलाना [...]

*ज़बान*

ज़बान का जो खरा नहीं है! यकीन उसपे ज़रा नहीं है!! :::::::::::::::::::: लगे [...]

*वक्त बदलेगा हमारा देखना*

*वक्त बदलेगा हमारा देखना* वक्त बदलेगा हमारा देखना ! शान से [...]

* मंज़िलों के दीप*

मेरी हिम्मत देखकर जब रास्ते चलने लगे ! मंज़िलों के दीप हर सू [...]

*हर खुशी माँग ली*

हर खुशी माँग ली दोस्तों के लिये! खैर-मकदम किया दुश्मनों के [...]

*गर्दिशों के दौर में भी मुस्कुराना चाहिये*

वज़्न - 2122 2122 2122 212 अर्कान - फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन [...]

*पत्थरों के दिल*

वज़्न - 2122 2122 212 अर्कान - फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन [...]

*होली*

समां रंगीन होली का बड़ा दिलकश नज़ारा है ज़माने भर की' खुशियों [...]

*बेटियाँ*

ईश्वर का उपहार बेटियाँ वीणा की झनकार [...]

*हमेशा*

*हमेशा* 122 122 122 122 फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मुहब्बत [...]

दवा से जो नही होते

*दवा से जो नहीँ होते* 1222 1222 1222 1222 दवा से जो नहीँ होते दुआ से काम [...]

*बेटियाँ*

आसमां छू रही आज हैं बेटियाँ ! इक महकता हुआ राज़ है बेटियाँ [...]

*मौत से नज़रें मिलाना आ गया*

2122 2122 212 दर्द दिल का फ़िर लबों पर आ गया याद जब  गुज़रा ज़माना आ [...]

*जुबां*

1222 1222 1222 1222 सदा बोलो सँभलकर ही जुबां तलवार होती है! नज़ाकत से रखो [...]

*ज़िंदगी ने अब किया*

2122 2122 2122 212 फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन ज़िंदगी ने अब [...]

*बेटियाँ*

2122 2122 2122 212 थम गयी साँसें सभी जबसे पढ़ा अख़बार है ! अब भगत-आजाद की [...]

*अश्क*

अश्क आँखों में दबाना सीख ले दर्द में भी मुस्कुराना सीख [...]

*जिन्दगी*

ईश्वर का उपहार जिन्दगी एक निराला प्यार जिन्दगी साहस और लगन [...]

*चाँद को देखकर*

चाँद को देखकर चाँद कहने लगा ईद की ही तरह अब तू' मिलने लगा देख [...]

*दर्द*

आधार छंद =आनंदवर्धक मापनी =2122 2122 212 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: दर्द में [...]

*दुआ का असर*

आधार छंद-वाचिक भुजंगप्रयात मापनी -122 122 122 122 दुआ का असर ये दुआ का [...]

*क्यूं*

कर रहा क्यूँ आदमी अभिमान है जब ठिकाना आखिरी शमशान है चार दिन [...]

*मुकद्दर*

मुकद्दर जहाँ में उसी का हुआ है खुद पे ही जिसने भरोसा किया [...]