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Author: चन्‍द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’

चन्‍द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
Posts 50
Total Views 611
मैं ग़ाफि़ल बदनाम

विधाएं

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हाय!

आशिक़ों के जो निकले दम होंगे हुस्न के यूँ भी क्या सितम [...]

कहाँ मैं थोक हूँ मैं भी तो यार खुदरा हूँ

मुझे निहार ले क़िस्मत सँवार सकता हूँ फ़लक़ से टूट के गिरता हुआ [...]

आह! यह क्या से क्या हो गया

बावफ़ा बेवफ़ा हो गया आह! यह क्या से क्या हो गया उनसे आँखे मिलीं [...]

साक़ी इधर भी ला न ज़रा और ढाल कर

मैं लुट चुका हूँ वैसे भी अब तू न चाल कर जैसा भी मेरा दिल है उसे [...]

सो मिल गया है आज मुझे दार, क्या करूँ?

हूँ जामे चश्म तेरा तलबगार, क्या करूँ? तक़्दीर से पै आज हूँ [...]

कोई ग़ाफ़िल कहाँ भला जाए

जी मेरा भी सुक़ून पा जाए तेरा जी भी जो मुझपे आ जाए काश आ जाऊँ [...]

कल सताएगा मगर, लगता है

कोई सीने से अगर लगता है जी क्यूँ फिर सीना बदर लगता है तूने तो [...]

आतिशे उल्फ़त को हर कोई हवा देने लगे

बोसा-ओ-गुल फोन पर अब रोज़हा देने लगे हाए यूँ उश्शाक़ माशूकः को [...]

नज़र अपना निशाना जानती है

आदाब दोस्तो! दो क़त्आ आप सबको नज़्र- 1. जो अपना सब गँवाना जानता [...]

सजाकर जो पलक पर आँसुओं का हार रखता है

कहोगे क्या उसे जो तिफ़्ल ख़िदमतगार रखता है औ तुर्रा यह के [...]

चाँद सह्न पर आया होगा

होगी आग के दर्या होगा देखो आगे क्या क्या होगा ख़ून रगों में [...]

उल्फत की रह में आग का दर्या ज़ुरूर है

फिर भी नहीं है शम्स, उजाला ज़ुरूर है देखे न देखे कोई, तमाशा [...]

किस सिफ़त का ऐ मेरे मौला तेरा इजलास है

इस शबे फ़ुर्क़त में तारीकी तो अपने पास है क्यूँ हुआ ग़ाफ़िल उदास [...]

कोई नहीं है यूँ जो तुम्हें आदमी बना दे

मतलब नहीं है इससे अब यार मुझको क्या दे है बात हौसिले की वह [...]

तो अब वह घसछुला बेगार वाला याद आता है

न तू बोलेगा तुझको क्या पुराना याद आता है तो ले मुझसे ही सुन ले [...]

बात हो जाए अब आर या पार की

जी में सूरत उभर आई फिर यार की कोई पाज़ेब इस क़द्र झंकार [...]

ख़ूबसूरत शै को अक़्सर देखिए

मेरा दिल है आपका घर देखिए जी न चाहे फिर भी आकर देखिए आप हैं, [...]

लोग कहते हैं वो शीशे में उतर जाते हैं

देखा करता हूँ उन्हें शामो सहर जाते हैं पर न पूछूँगा के किस [...]

काश!

जी की धड़कन भले ही थम जाती आपसे हम मगर मिले [...]

सब हमारा ही नाम लेते हैं

जामे लब शब् तमाम लेते हैं लेकिन उल्फ़त के नाम लेते हैं दिल पे [...]

अब सवाले इश्क़ पर तू हाँ कहेगा या नहीं

पेचो ख़म बातों का, तेरी ज़ुल्फ़ों सा सुलझा नहीं अब सवाले इश्क़ पर [...]

किसी ग़ाफ़िल का यूँ जगना बहुत है

भले दिन रात हरचाता बहुत है मगर मुझको तो वह प्यारा बहुत है वो [...]

वक़्त गुज़रा तो नहीं लौट कर आने वाला

बात क्या है के बना प्यार जताने वाला घाव सीने में कभी था जो [...]

कोई तो राधिका हो

आदाब! फिर वृन्दावन भी होगा और साँवरा भी होगा है शर्त यह के [...]

सोचता हूँ तो है मुद्दआ कुछ नहीं

वस्ल का हिज़्र का सिलसिला कुछ नहीं या के जी में तेरे था हुआ कुछ [...]

तू भी इल्ज़ाम लगाना तो ख़बर कर देना

जब तसव्वुर से हो जाना तो ख़बर कर देना या के मुझको हो भुलाना तो [...]

ज़माने तेरी मिह्रबानी नहीं हूँ

शजर हूँ, तिही इत्रदानी नहीं हूँ चमन का हूँ गुल मर्तबानी नहीं [...]

शाइरी काफ़ी नहीं सूरत बदलने के लिए

मंज़िले उल्फ़त तो है अरमाँ पिघलने के लिए है नहीं गर कुछ तो बस इक [...]

लुटाया भी जी आदमी आदमी पर

क़शिश तो है इसमें है यह सिरफिरी, पर लगी आज तुह्मत मेरी दोस्ती [...]

क्यूँ नहीं दिल पर मेरे डाका पड़ा

देखिए कुछ हज़ल सी हुई क्‍या? *** इश्क़ तो यारो मुझे मँहगा [...]