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Author: भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

भगवती प्रसाद व्यास
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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गज़ल/गीतिका (16 Posts)


” ———————————————- फूल मुस्कराते हैं ” !!

आंखों में तुम हो बसे , रंग नये भाते हैं ! पलकों में सजते सपन , और [...]

” ————————————————— खुद से खा गये धोखा ” !!

आंखों में खुशियां छलके है , यादें बनी झरोखा ! यायावरी हुआ है [...]

” ——————————————–अर्थ समझ गये गहरे ” !!

गहरे जल में बिम्ब उभरते , अनजाने से गहरे ! दर्पण दिखलाता है [...]

” ———————————-चुनरिया ना ढलकाओ ” !!

नयनों के कटोरों से , मद को नहीं छलकाओ ! राह चलते हम तो लुटे , और [...]

” ————————————- हमको नहीं बहा ले ” !!

समझ नहीं कुछ पाए तुझको , खत में क्या लिख डालें ! नाम नाम ही रट [...]

” ——————————————खुशियां समेटे थे” !!

ये जो बोल बिखरें हैं , बरसों से समेटे थे ! नाग की तरह ये तो , [...]

” ———————————————- बस यादों में बसना ” !!

रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में प्रस्तुत : रेशम जैसा रिश्ता [...]

” ——————————————- फीके सभी मज़े हैं ” !!

मित्रता दिवस के उपलक्ष्य में प्रस्तुति : कुंआ खाई सम्मुख [...]

” —–————————- समय का ईशारा है ” !!

ये जो तेरी आंखें हैं , जीने का सहारा हैं ! प्यास है कि घटती नहीं [...]

” पल मुस्कराने लग गये ” !!

कदम क्या संभले हमारे , वे पास आने लग गये | अपना पराया पहचानने [...]

” डूब जाऊं झील से गहरे नयन ” !!

ढूंढता रहा जिसे गगन गगन ! तुम उजाले की वही किरन किरन !! उम्र की [...]

” ———————————– आँखों का पानी है ” !!

रंग चढ़ा चेहरों पर , रंगी जिंदगानी है / आँखों से छुप ना सके , कोई [...]

” ——————————- धूप सी खिलती है ” !

रंग यहाँ खिलते हैं , मस्तियाँ छलकती है / मुस्कराकर ज़िन्दगी , [...]

” ———————————————मैंने कहा दुआ आई ” !!

माँ के पोपले, मुंह से यों हवा आई / लोग हँसते रहे,मैंने कहा दुआ [...]

” ———————————– खूबसूरत जहां है ” !!

माँ ने कहा था , खूबसूरत जहां है ! बन्द हुई आँख , फिर कुछ न यहां [...]

” ——————————————————— वक़्त के खजाने से ” !!

ख़्वाब कई बुन डाले , खुशियों के मुस्काने से ! कुछ तो केश हो ही [...]