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Author: Bhagwati prasad Vyas " neerad "

Bhagwati prasad Vyas
Posts 52
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एम काम एल एल बी! स्वतंत्र लेखन ! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी आदि पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! कवि सम्मेलनों में रचना पाठ ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत आदि साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद आदि साझा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य !

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

” जंगल सी ज़िन्दगी , मेमने से हम ” !!

सरसराती हवाएं , कंपकंपाती हैं ! उठता है शोर कहीं , नींद जाती [...]

” घनेरी जुल्फें घटा सी छाई ” !!

हवा में नमी है , बिखरी है खुशबू ! मौसम है बहका , जगा ऐसा जादू [...]

” धर्म हमारा बड़ा लचीला ” !!

मन्त्रों में , वेदों में है वो , पत्थर की मूरत में है वो | ना [...]

” आंखें मुन्द रही हैं , प्यार में ” !!

कल्पनाएं मधुर , पलकों पर विराजी ! सिमटी लाज में , काया कसमसाती [...]

” लहरों का किलोल , मन को भाता है ” !!

भीड़भाड़ हो , या तनहा हों ! सुख के पल हों , या दुखवा हो ! इन टूट रहे [...]

” साँझ देखो खिलखिलाई है ! अरुणिमा अम्बर पे छाई है ” !!

थका हारा दिन , हो गया है पस्त ! रात की जवनिया , है सदा अलमस्त [...]

” उठे हिया में हिलोर ” !!

द्वार पे आकर , लौट गये तुम ! उम्मीदें सब यों , हो गई गुमसुम ! सजे [...]

” सर्र से , आँचल – सरकता जाये है ” !!

छट गये , बादल गम के ! होश खो बैठे , कसम से ! राह चलता कारवां [...]

” हम ज़िन्दगी , ठेल रहे हैं !!

पहले पेट काम फिर दूजा ! शिक्षा दीक्षा वक़्त अबूझा ! मात पिता [...]

” हो गये पल में पराये ” !!

नेह के धागे बन्धे थे , द्वार खुशियों से सजे थे ! बचपन की यादें [...]

” हम तो तुम्हरे दास हो गये ” !!

कमर कटीली , भुजदंड कसे ! है रूपगर्विता , मद छलके ! नटखट नज़रें [...]

” कितना और सजोगी ” !!

नख से शिख , अलंकरण है ! सजे सजे से , तन मन हैं ! नज़रों से ऐसा [...]

सच तुम रूठ जाओ तो , मनाने का मज़ा कुछ और है !

बातों बातों में ठुनकना ! होठों से निर्झरणी बहना ! भूकम्प के [...]

सच तुम रूठ जाओ तो

सच तुम रूठ जाओ तो मनाने कासच तुम रूठ जाओ तो मनाने का मज़ा कुछ [...]

” हम तुम रंग गए हैं , एक ही रंग में ” !!

अबीर है गुलाल है , बहकी हुई चाल है ! पीली भंगिया कहीं , सुरूर है [...]

” गुलाल है ,धमाल है ,कहिये क्या -ख़याल है ” !!

रंगों की महफिल , डूबे डूबे से हैं ! सब अपने लगते , रंग अजूबे से [...]

” घूंघट में अठखेली करते , प्रियतम मेरे मन भाव रे ” !!

जब हटा आवरण देखोगे तो , वे गाल गुलाबी होंगे ! अधरों पर लरजन [...]

” है विकास में देर अभी ” !!

हरियाली सब और नहीं है , हरा भरा सब छोर नहीं है ! यहाँ प्रकृति [...]

” होंसला तुमने दिया , बढ़ते रहे कदम ” !!

पीछे जो देखा , एहसास हो गया ! फासले हुए कम , विश्वास हो गया [...]

” नज़रों को मेरी तूने , बाँध लिया है ” !!

टकटकी लगाए यों मैं , देखती रही ! लज़्ज़ा के आवरण , समेटती रही [...]

” कटी उम्र यों ही ” !!

खेत, खलिहान , पगडंडियां संकरी ! घूँघट ,पनघट , हंसी रही सिकुरी [...]

” पैंजनिया बाजी संतूरी ” !!

उषा अरुणिम , कपोल पर बिखरी / अधर गुलाबी , हंसी भी संवरी / मन [...]

” बन्द आँखों में , ऐसी सिमटी हया ” !!

साज है , श्रृंगार है , मान है , मनुहार है ! भेद रही नज़रें जो [...]

” डूबी हूँ , तेरे ख्यालों में ” !!

मुंडेरों से धूप उतरी , लहरा गई ! रुख़सार को ठंडी हवा , सिहरा गई [...]

” ———————————– आँखों का पानी है ” !!

रंग चढ़ा चेहरों पर , रंगी जिंदगानी है / आँखों से छुप ना सके , कोई [...]

” मस्तियाँ आँखों में छाई ” !!

शहद धरे ,अधर तेरे , चितवन कमान ! डिम्पल गालों में छुपे , तिरछी [...]

” ——————————- धूप सी खिलती है ” !

रंग यहाँ खिलते हैं , मस्तियाँ छलकती है / मुस्कराकर ज़िन्दगी , [...]

” झूंठा है , शर्माना तेरा ” !!

यों गुलाब की पँखुरी सी , तुम लगी गुलबिया ! चंचल नयना करे [...]

” ऐसी गई ठगी , कानों सुनी न – अधर धरी “

एहसासों की चौखट पर , मन का नर्तन ! मधुर कल्पनाओं का नित , होता [...]

” शिक्षा – दीक्षा, मनी -मनी है “

अभिभावक की गहन परीक्षा , इंटरव्यू फिर प्रवेश- समीक्षा [...]