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Author: Bhagwati prasad Vyas " neerad "

Bhagwati prasad Vyas
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

” ————————————————- चाँद भी है शर्माया ” !!

घूँघट हटा चांदनी बिखरी , शीतल शीतल छाया ! यहां वहां फैला [...]

” ————————————————- समय बड़ा चंचल है ” !!

आहट आज पवन है लाती , या मन में हलचल है ! बेकरार सी लगे निगाहें , [...]

” ——————————————- कैसे काटें रतिया ” !!

नज़र चुराकर नज़र मिलाते , होते हैं जो छलिया ! खेल खेल में हंसी [...]

” ——————————————–अर्थ समझ गये गहरे ” !!

गहरे जल में बिम्ब उभरते , अनजाने से गहरे ! दर्पण दिखलाता है [...]

” ———————————-चुनरिया ना ढलकाओ ” !!

नयनों के कटोरों से , मद को नहीं छलकाओ ! राह चलते हम तो लुटे , और [...]

” ————————————- हमको नहीं बहा ले ” !!

समझ नहीं कुछ पाए तुझको , खत में क्या लिख डालें ! नाम नाम ही रट [...]

” —————————————- नयना बस बहते हैं ” !!

मंत्री जी के यही आंकड़े , रोज़ शिशु मरते हैं ! और मीडिया किस्से [...]

” ——————————————खुशियां समेटे थे” !!

ये जो बोल बिखरें हैं , बरसों से समेटे थे ! नाग की तरह ये तो , [...]

” माँ ने किया अबोला है ” !!

काम काज है , फुरसत ना है , बांध दिया यह झूला है ! मां ने किया [...]

” ————————————— कैसे दिल बहलाएं ” !!

कठिन डगर है पग में छाले , अब तो चला न जाए ! हमराही ने बांह छोड़ [...]

” —————————————– खुशियां सभी टिकी हैं ” !!

घूँघट में है छिपी हया तो , पलकें झुकी झुकी हैं ! पल पल दिल बैचेन [...]

” —————————————– सपने कैसे पालें ” !!

कूट कूट पाषाण घड़े हैं , हैं आकार निराले ! जिन हाथों में शैशव [...]

” ———————————————- बस यादों में बसना ” !!

रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में प्रस्तुत : रेशम जैसा रिश्ता [...]

” ——————————————- फीके सभी मज़े हैं ” !!

मित्रता दिवस के उपलक्ष्य में प्रस्तुति : कुंआ खाई सम्मुख [...]

” ———————————–सचमुच एक बहाना है ” !!

" तेरा रूठना कह दे बहना - सचमुच एक बहाना है " !! जिन आंखों में [...]

” ————————————- हरकत मनमानों सी ” !!

सावन की रिमझिम बूंदों ने , प्यास बुझाई ऐसी ! हरियाली चुनरी ओढ़ी [...]

” —————————————– सपने हुए कपूरी ” !!

याचक बनना कौन चाहता , लेकिन है मज़बूरी ! घुटनों पर हम आ बैठे हैं [...]

” ————————————— चुनरी सरकी जाये ” !!

दप दप करता रूप तुम्हारा , ऋतुओं सा बल खाये ! आग का गोला काहे [...]

” ———————————————– अंखियन छूटा काजर ” !!

हंसी कैद घूँघट में देखो , खुशियां छलके बाहर ! हाथों में चुड़ले [...]

” ——————————————– अँखियाँ गहरी गहरी ” !!

अधरों पर कुछ राज़ छिपे हैं , मुस्कानें हैं गहरी ! मनवा में [...]

” ————————————-अपने माथे चंदन ” !!

बिगड़ी बनती सरकारें हैं , कैसे हैं गठबंधन ! आज अछूत हुए वे अपने , [...]

” ——————————————निखरी हुई हया है ” !!

मस्त पवन ,बौराई खुशबू , किसको होंश यहां है ! मौसम के रंग डूबे हम [...]

” मन हुआ गुलबिया ” !!

लेपित चंदन , मले हल्दी - और उबटन | रूप सजा , संवरा तो - लगा ज्यों [...]

” तन हुआ बंसुरिया ” !!

प्रियतम का स्पर्श पा , मानो धन्य हुई | छुअन की अनुभूति में [...]

” हो अंत भली सरकार ” !!

बिजली विजली कहाँ मिले , रोशन है कंदील ! भीड़ भाड़ के रेले ना हैं [...]

” गड्ढे गड्ढे हिचकोले है , सड़कें खो गई ” !!

सड़क किनारे घर हैं , पोखर पोखर पानी ! यह विकास की गाथा , घर घर [...]

” झूल रहा है ललना पलना ” !!

किस्मत की रेखाओं में दम ! हमें मिला है अथक परिश्रम ! हैं रोज बो [...]

” ———————————- —— नयना लड़े पड़े हैं ” !!

रूप रंग की छांव घनेरी , नख़रे नाज़ बड़े हैं ! हम तो अपने आप को भूले , [...]

” —————————खुद को आज छलेगा ” !!

आज की रचना का मूल आधार बना है - " Azam Khan’s controversial statement against the Indian Army [...]

” —–————————- समय का ईशारा है ” !!

ये जो तेरी आंखें हैं , जीने का सहारा हैं ! प्यास है कि घटती नहीं [...]