साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Bhagwati prasad Vyas " neerad "

Bhagwati prasad Vyas
Posts 42
Total Views 9,124
एम काम एल एल बी! स्वतंत्र लेखन ! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी आदि पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! कवि सम्मेलनों में रचना पाठ ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत आदि साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद आदि साझा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य !

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

” हम तो तुम्हरे दास हो गये ” !!

कमर कटीली , भुजदंड कसे ! है रूपगर्विता , मद छलके ! नटखट नज़रें [...]

” कितना और सजोगी ” !!

नख से शिख , अलंकरण है ! सजे सजे से , तन मन हैं ! नज़रों से ऐसा [...]

सच तुम रूठ जाओ तो , मनाने का मज़ा कुछ और है !

बातों बातों में ठुनकना ! होठों से निर्झरणी बहना ! भूकम्प के [...]

सच तुम रूठ जाओ तो

सच तुम रूठ जाओ तो मनाने कासच तुम रूठ जाओ तो मनाने का मज़ा कुछ [...]

” हम तुम रंग गए हैं , एक ही रंग में ” !!

अबीर है गुलाल है , बहकी हुई चाल है ! पीली भंगिया कहीं , सुरूर है [...]

” गुलाल है ,धमाल है ,कहिये क्या -ख़याल है ” !!

रंगों की महफिल , डूबे डूबे से हैं ! सब अपने लगते , रंग अजूबे से [...]

” घूंघट में अठखेली करते , प्रियतम मेरे मन भाव रे ” !!

जब हटा आवरण देखोगे तो , वे गाल गुलाबी होंगे ! अधरों पर लरजन [...]

” है विकास में देर अभी ” !!

हरियाली सब और नहीं है , हरा भरा सब छोर नहीं है ! यहाँ प्रकृति [...]

” होंसला तुमने दिया , बढ़ते रहे कदम ” !!

पीछे जो देखा , एहसास हो गया ! फासले हुए कम , विश्वास हो गया [...]

” नज़रों को मेरी तूने , बाँध लिया है ” !!

टकटकी लगाए यों मैं , देखती रही ! लज़्ज़ा के आवरण , समेटती रही [...]

” कटी उम्र यों ही ” !!

खेत, खलिहान , पगडंडियां संकरी ! घूँघट ,पनघट , हंसी रही सिकुरी [...]

” पैंजनिया बाजी संतूरी ” !!

उषा अरुणिम , कपोल पर बिखरी / अधर गुलाबी , हंसी भी संवरी / मन [...]

” बन्द आँखों में , ऐसी सिमटी हया ” !!

साज है , श्रृंगार है , मान है , मनुहार है ! भेद रही नज़रें जो [...]

” डूबी हूँ , तेरे ख्यालों में ” !!

मुंडेरों से धूप उतरी , लहरा गई ! रुख़सार को ठंडी हवा , सिहरा गई [...]

” ———————————– आँखों का पानी है ” !!

रंग चढ़ा चेहरों पर , रंगी जिंदगानी है / आँखों से छुप ना सके , कोई [...]

” मस्तियाँ आँखों में छाई ” !!

शहद धरे ,अधर तेरे , चितवन कमान ! डिम्पल गालों में छुपे , तिरछी [...]

” ——————————- धूप सी खिलती है ” !

रंग यहाँ खिलते हैं , मस्तियाँ छलकती है / मुस्कराकर ज़िन्दगी , [...]

” झूंठा है , शर्माना तेरा ” !!

यों गुलाब की पँखुरी सी , तुम लगी गुलबिया ! चंचल नयना करे [...]

” ऐसी गई ठगी , कानों सुनी न – अधर धरी “

एहसासों की चौखट पर , मन का नर्तन ! मधुर कल्पनाओं का नित , होता [...]

” शिक्षा – दीक्षा, मनी -मनी है “

अभिभावक की गहन परीक्षा , इंटरव्यू फिर प्रवेश- समीक्षा [...]

” बंशी तेरी , अधर धरूंगी ” !!

सपन सलोने , पलक द्वार पर ! बैठे ही हैं , अंगना बुहार कर [...]

” हार – जीत का छोर नहीं है ” !!

जन्मघुट्टी में यही मिला है , पुष्प सदा काँटों में खिला है [...]

” अब शरारत – होने को है ” !!

मौन तुम हो , मौन हम हैं ! जितना पा लें , उतना कम है ! दुनिया [...]

” अपनी अपनी पोथी , अपना अपना भाष ” !!

कम, पढ़े -लिखे गुणी हैं ज्यादा , पढ़े -लिखों ने सब कुछ नापा / संतों [...]

” हँसते हँसते , कट गया दिन ” !!

बिछ गयी चादर , दरिया किनारे ! होंसलों को देख , विहँसे नज़ारे [...]

” अभी बहुत कुछ , छूटा सा है ” !!

तेज़ भर रहा , वक़्त कुलांचें ! मन की पीड़ा , कौनहु बाँचें ! शुष्क [...]

” ———————————————मैंने कहा दुआ आई ” !!

माँ के पोपले, मुंह से यों हवा आई / लोग हँसते रहे,मैंने कहा दुआ [...]

” ऐसे न निहारो ” !!

समय से पहले , दस्तक मेरी ! आँखों में बस , छवि है तेरी ! यों अचरज [...]

” ———————————– खूबसूरत जहां है ” !!

माँ ने कहा था , खूबसूरत जहां है ! बन्द हुई आँख , फिर कुछ न यहां [...]

” ——————————————————— वक़्त के खजाने से ” !!

ख़्वाब कई बुन डाले , खुशियों के मुस्काने से ! कुछ तो केश हो ही [...]