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Author: Brijpal Singh

Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा हो रहा है कोशिश भी जारी है !!

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बचपन

यादों के साये पसेरे चलना माँ के पल्लू पकड़े कभी [...]

बसंत

लो फ़िर बसंत आया है छंट गए बादल घनें और यही गज़ब की साया है [...]

मातृभूमि

मातृभूमि में जियूँगा मातृभूमि में मरूंगा मैं कर जाऊँगा [...]

मैं तो कहता हूँ

मैं तो कहता हूँ...... मैं तो कहता हूँ हर युवा को अब जाग जाना [...]

मुक्तक

हकीकत जानकार भी क्यों अंजान हैं सब, जीत गए हैं बाज़ी फ़िर [...]

सुनहरे पल

वो हर लम्हा सुनहरा होता है जो अनुरूप हमारे साथ खड़ा होता [...]

गज़ल

------------------- ठहरे जीवन को मेरे रवानी मिली गहरे पानी में अब निशानी [...]

ग़ज़ल

_________________ मेरा दिल मेरा आईना तो दिखा दे घने सन्नाटे में आवाज़ [...]

धुंध ही दिखता है

हर जगह मुझे अब धुंध ही दिखता है इंसान को ही देखो दर-दर बिकता [...]

अकेलापन

उम्र का ये पड़ाव कैसा है , जहाँ सब कुछ तो है फिर भी अकेलेपन का [...]

मज़दूर हूँ ……

मज़दूर हूँ ....... और मज़बूर भी वो दिहाडी और वो कमाई ....... मेरे [...]

वो रात

---------- ज़िंदगी का ज़िंदगानी का भरी भागदौड, आबादी का वो रात ,वो [...]

मान जाओ

----------- दिल सच्चा है तो सच्चे दिखोगे यूँ ही हरदम....... बच्चों [...]

ज़ंग

आशा और निराशा के बीच झूलते-डूबते - उतराते घोर निराशा के क्षण [...]

एक शख्स यह भी ( कहानी )

एक शख्स यह भी" __________ रोज़ाना की तरह मैं उस दिन भी सुबह की सैर [...]

आज़ादी और देश प्रेम विशेषांक

_________________________ आज़ादी कहीं खोई नहीं थी जो मिल गई, आज़ादी दिलवाई [...]

नहीं पता

मुझे मंज़िल का नहीं पता मुझे रस्ते का नहीं पता चला जा रहा [...]

है कोई …………

है कोई ............ भूखे को भोजन प्यासे को पानी पिला दे बीमार को दवा [...]

हे ! मेरे फेसबुक …………

फेसबुक ने मुझे नई ज़िंदगी दी जीने की एक वजह दी, प्यार भी हुआ [...]

यादें

सोचता हूँ अब याद न करूँ.. उस बुरे वक्त को उस कठिन राह को उस [...]

क्यों बेदहमीं है

आप तो आप हो जी, हम हमीं हैं सब कुछ तो ठीक है मगर तो फ़िर कहाँ [...]

कहाँ

बतलाते हैं अमीर बहुत से लोग शहरों के यहां मगर मैं कभी जान न [...]

सोचूं अब चोर ही बन जाऊँ…….

सोचूं अब चोर ही बन जाऊँ....... _______________________________ डालूं डाका किसी बैंक [...]

ये आँशू किसके लिये

अपनो ने अपनापन तोडा गैरों की तो बात ही क्या उम्मीद भी [...]

!!!!!! ढूँढते हैं !!!!!!!

क्या कयामत आई है दिल-ए दीवाना तुझे ही ढूँढते हैं [...]

“बरसात”

तब हम परेशां थे इस बारिश से.. अब तो रोना है साहब रोना [...]

” रहने दो “

'योग' ही रहने दो 'योगा' न बनाओ... अ को 'अ' ही रहने दो.... यूं 'आ' न बनाओ, [...]

“ग़ज़ल”

मेरे दिल को अब कोई भाता नहीं है कोई भी तो वादा निभाता नहीं [...]

अचंभित हूँ ….(कहानी)

बात बीते साल की है ! जब मैं इस शहर मैं नया-नया सा था, अनजान शहर [...]

रिक्ति (लघुकथा

घड़ियाली आंसू बहाना अब बंद करो, शोक सभा समाप्त हो गई है, अब [...]