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Author: Shivkumar Bilagrami

Shivkumar Bilagrami
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शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक पद पर कार्यरत । शिवकुमार बिलगरामी आज के दौर के मशहूर शायर और गीतकार हैं। आपकी ग़ज़लें देश विदेश के कई ग़ज़ल गायकों द्वारा गाई जा रही हैं । इनका एक ग़ज़ल संग्रह नई कहकशां प्रकाशित हो चुका है।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

युद्ध के उन्माद

न जाने कौन सा आनन्द इस अतिवाद में है जिसे देखो वही अब युद्ध के [...]

सैंकड़ों गोते

सैंकड़ों गोते समुन्दर में लगाये हैं तब कहीं दो चार मोती हाथ [...]

जहाँ भर में

जहां भर में अमन का ग्राफ़ नीचे जा रहा है जिसे देखो वही तलवार [...]

तुम्हें बादल दिखायेगा

तुम्हें बादल दिखायेगा तुम्हारे वोट ले लेगा मगर कोई [...]

मुश्किलों के दौर को

मुश्किलों के दौर को हम खुद पे ऐसे सह गए कुछ तो आँसू पी लिए कुछ [...]

अपनों से न गैरों से

अपनों से न ग़ैरों से कोई भी गिला रखना आँखों को खुला रखना [...]

हमदर्द कैसे कैसे

हमदर्द कैसे कैसे हमको सता रहे हैं काँटों की नोक से जो मरहम [...]

मेरी सोच

मेरी सोच मेरी हदों का निशां है मगर इसके आगे भी कोई जहां [...]