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Author: Bhaurao Mahant

Bhaurao Mahant
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दोधक छंद

211 211 211 22 साजन-साजन रोज पुकारूँ आँगन-आँगन द्वार निहारूँ। [...]

मुक्तक

वक्त हँसाता है वक्त रुलाता है। जो वक्त गँवा दे वो पछताता [...]

मुक्तक

आज कैसा सवाल आया है उन अमीरों पे काल आया है। नोट जिनके करीब [...]

मुक्तक

विलोम शब्द आस्था:- 2122 1212 22 आस्था पे सवाल आया है जाने' कैसा [...]

मुक्तक

2212 2212 2212 2212 ये भूल मानव की कहूँ ,या काल की मैं [...]

मुक्तक

समंदर के किनारों पर निशां गर हम बनायेंगे मगर उसकी लहर को हम [...]

मुक्तक

122 122 122 122 मेरे साथ में एक हलचल हुआ है बताऊँ मैं कैसे बड़ा छल [...]

चौपाई

जीवन अपना फूलों-सा है जीना लेकिन शूलों-सा है। जो भी शूलों पर [...]

मुक्तक

कोई बादशाह यहाँ, कोई बना गुलाम करे गुलामी रात दिन,करते रहे [...]

उल्टी बात

कुण्डलिया छंद लम्बूजी छोटे दिखे, छोटूजी छह फीट। सीधेजी [...]

मोटूमल का भोजन

खाते रात दिवस रहे, मोटूमल भरपेट। लड्डू पेड़ा और सभी, होता उनको [...]

आज के गीत

~~~~~~कुण्डलिया छंद~~~~~~ सुनते राम भजन सभी,,,हो जाते हैं [...]

जीवन सत्य

हुआ प्रस्थान बचपन का हुआ आगाज यौवन का यहीं प्रारंभ होता है [...]

जीत का जश्न

हमारी जीत पर कैसे धमाका हो रहा यारो बजे अब ढोल ताशे नाच गाना [...]

कटे सब पेड़ जंगल के

कटे सब पेड़ जंगल के हुआ अब ठूँठ जग सारा सुहानी इस धरोहर पर गया [...]

देश भक्ति ग़ज़ल

221 1222 221 1222 ये खून खराबा अब स्वीकार नहीं होगा गर वार किया [...]

मुक्तक – 2

चुल्हों में सभी के नहीं रोटियाँ बदन पे सभी के नहीं [...]

मुक्तक

माँ को मेरे ऐसा अक्सर लगता है। मेरा बेटा अब तो अफ़सर लगता है [...]