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Author: राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय

राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय
Posts 28
Total Views 541
एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व कवि, लेखक , वैज्ञानिक , दार्शनिक, पर्यावरणविद् एवं पुरातन संस्कृति के संवाहक.....संरक्षक...

विधाएं

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आ जाना मेरे पास प्रिये !

अभि कल तक तुमने यूं ही प्यार किया , अहो विलक्षणी ! तुने कैसा [...]

स्वर्णिम भारत की बेटियाँ

संसार की सार अाधार हो तुम जीवन की हर सत्कार हो तुम मंगल शांति [...]

योग दर्शन

वृहत्तर भारत के अमर वंश की, उच्चत्तम यही कहानी है [...]

धरा का तु श्रृंगार किया है रे !

तू धीर, वीर ,गंभीर सदा जीवन को उच्च जिया है रे, तु दुःखियों को [...]

ये देशद्रोही कौन हैं !

अभि कल तक जो देशद्रोह फैलाते मानवता पर गौण हैं, सेना को [...]

आर्त्त गैया की पुकार

कंपित! कत्ल की धार खडी ,आर्त्त गायें कह रही - यह देश कैसा है [...]

वीरव्रती बंटी

तू मानवता के मूर्त्तमान, हे धर्मवीर ! तुझसे सम्मान प्रकृति [...]

गौ – चिकित्सा गर्भ समस्या…

गौ - चिकित्सा .गर्भ समस्या । - गौ - चिकित्सा .गर्भ समस्या [...]

काहें ! भूल गयले रे भाई !

काहें भूल गयले रे भाई ! अब आपन नया साल के मनाई ! काहें भूल [...]

मंगल नववर्ष मनाएंगे

गाँव-गाँव में शहर-शहर में, कैसी छायी उजियाली है; खेतों में अब [...]

वह

वह हर दिन आता सोचता बडबडाता,घबडाता कभी मस्त [...]

वीरों नववर्ष मना लें हम

है तिमिर धरा पर मिट चुकी आज भास्वर दिख रहे दिनमान , शस्य - [...]

आ जा चित्तवन के चकोर

स्वर्णिम यौवन का सागर-अपार टकरा रहा तन से बारंबार विपुल [...]

तेरी याद सदा आती है

तेरी याद सदा आती है.... मुझको तू हरदम भाती है... रहता हूँ शांत [...]

कष्ट भरा गणतंत्र

जिस मिट्टी को सींचा जिसने लहू से बलिदानी , बचा गये सभ्यता बहु [...]

आज मेरा मन डोले !

आकुल-व्याकुल आज मेरा मन , ना जाने क्यों डोले..... विघटित भारत की [...]

भारत भूमण्डल के मंगलस्वरूप !

संसार की सार आधार हो, स्थूल, सूक्ष्म पावन विचार हो दिव्य [...]

प्राण कहाँ !

हे मेरे भारत के लोग कैसा दुःखद ये संयोग; सह रहे जो आजतक [...]

मंगलमय पुकार करूँ

यदि जीवित रहूँ माते, तेरा ही श्रृंगार करूँ अर्पण करूँ [...]

वीरों की यादें

धरा के भव्य सुत तू राष्ट्र रक्षक दूत तू कहाँ करता विश्राम [...]

शक्ति – पुँज

धन -धान्य संपदा यौवन जिनके भूतल में समाये जन्मभूमि के [...]

गौरव उत्थान भारतभूमी की

भारत भू वीरोँ का गौरव वीरोँ का स्थान ऋषि मुनि यति तपस्वी [...]

अखंड भारत की ओर

आघातोँ की राहोँ मेँ सुन्दर मुस्कान बढाता जा, राष्ट्रदूत हे [...]

विध्वंस धरा पर क्यों ?

तेरी यादों में जन मुरझाये हुए हैं सोच सोच कर भी सुखाये हुए [...]

चिर विभूति की ओर

एक दिवस ना जाने किस दृश्य को भूला ना पाया होगा 'वो' न जाने [...]

स्वदेशी लोग

स्वदेशी लोग उदासीन जीवन को ले क्या-क्या करते [...]

आर्यावर्त की गौरव गाथा

आर्यावर्त की गौरव गाथा भ्रमण करते ब्रह्मांड में असंख्य [...]

नववर्ष धरा पर कब?

ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं है अपना ये त्योहार नहीं है अपनी [...]