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Author: Shri Bhagwan Bawwa

Shri Bhagwan Bawwa
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कविता (6 Posts)


उत्कर्ष

खेल खेल में हंसते-गाते ज्ञान के दीप जलाएंगे उत्कर्ष हमारा [...]

“बेटी”

"बेटी" मन लगाकर पढ़ती हूं , और शान से जीती हूं ! मैं तो अपने [...]

जोड़कर बढ़ो

रूढियों को पीछे , छोड़कर बढ़ो, जो भी टूटा है उसे जोड़कर बढों [...]

“नया साल”

नया साल दहलीज पे,खङा रहा है बोल। सूरज बांटे रोशनी,चित के पट को [...]

सबको सच्चा प्यार मिले !

हर बालक- बालिका को शिक्षा का अधिकार मिले, थोड़ा कम ज्यादा हो [...]

अच्छी बेटी

सभी बेटियों को समर्पित ! मन लगाकर पढ़ती हूं , और शान से जीती [...]