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Author: Shri Bhagwan Bawwa

Shri Bhagwan Bawwa
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गज़ल/गीतिका (5 Posts)


मेरी ग़ज़ल के दो शेर

चेहरे पर मुखौटा , तेरे शहर के लोग लगाए रहते हैं । दिल में कुछ [...]

मेरी ग़ज़ल के दो शेर

तेरे शहर में रिश्तो का कोई सम्मान नहीं होता , मेरे गांव की तरह [...]

हम

हमारे जैसा ही होना चाहकर भी, जब हो नही पाते हैं । हमारे काम [...]

“प्यार सिखाते हैं”

हम ज़िन्दगियों को बनाने का काम करते हैं, प्यार सिखाते [...]

“आग मेरी अर्थी में लगाने से पहले”

सोचो जरा दिल लगाने से पहले! मिटा तो ना दोगे बनाने से [...]