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Author: Shri Bhagwan Bawwa

Shri Bhagwan Bawwa
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

उत्कर्ष

खेल खेल में हंसते-गाते ज्ञान के दीप जलाएंगे उत्कर्ष हमारा [...]

माँ

आंचल तुम्हारा दरख्तों की छाया है माँ, हर धूप से टकराना तुमने [...]

“बेटी”

"बेटी" मन लगाकर पढ़ती हूं , और शान से जीती हूं ! मैं तो अपने [...]

जोड़कर बढ़ो

रूढियों को पीछे , छोड़कर बढ़ो, जो भी टूटा है उसे जोड़कर बढों [...]

हम

हमारे जैसा ही होना चाहकर भी, जब हो नही पाते हैं । हमारे काम [...]

उस बाबा को भूल गए ?

अभिव्यक्ति की आजादी,किसने दी थी बोल ? उस बाबा को भूल गए ? कैसा [...]

“नया साल”

नया साल दहलीज पे,खङा रहा है बोल। सूरज बांटे रोशनी,चित के पट को [...]

सबको सच्चा प्यार मिले !

हर बालक- बालिका को शिक्षा का अधिकार मिले, थोड़ा कम ज्यादा हो [...]

अच्छी बेटी

सभी बेटियों को समर्पित ! मन लगाकर पढ़ती हूं , और शान से जीती [...]

“दिवाली यूं मनाते हैं..”

चलों, इस बार दिवाली कुछ यूं मनाते हैं ! किसी भूखे को भर पेट [...]

“शहर को दुआ देते हैं”

किसी के आसूंओं को पोंछ कर, हंसा देते हैं ! इस बार, दिवाली कुछ इस [...]

“हँसी दे पाये सबको”

हँसी दे पाए सबको को,ऐसा शरूर देना ! जिन्दगी, हमें इतना समय [...]

“प्यार सिखाते हैं”

हम ज़िन्दगियों को बनाने का काम करते हैं, प्यार सिखाते [...]

“पिताश्री”

गर्दन उठा कर , शान से जीना सिखा दिया ! करता हूं नमन भगवान्; [...]

“करवा-चौथ”

हमारी जिंदगी में हर रोज करवा-चौथ आती है! मै जब तक खा नहीं [...]

“आग मेरी अर्थी में लगाने से पहले”

सोचो जरा दिल लगाने से पहले! मिटा तो ना दोगे बनाने से [...]