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Author: बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा
Posts 90
Total Views 1,269
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

ठहर जाता तो अच्छा था

मापनी 1222 1222 1222 1222 इधर जाता तो अच्छा था, उधर जाता तो अच्छा था. रहा [...]

सूरज सन्यास लिए फिरता

अँधियारा गद्दी पर बैठा, सूरज सन्यास लिए फिरता नैतिकता [...]

प्रेम पर होती टिकी हर देश की बुनियाद है

कैद हैं धनहीन तो, जो सेठ है,आजाद है झुग्गियों की लाश पर बनता [...]

कहने को शर्मीली आँखें

झील सी’ गहरी नीली आँखें हैं कितनी सकुचीली आँखें प्रेम अगन [...]

तमन्ना हमें न जन्नत की

कब किसी से यहाँ मुहब्बत की. जब भी’ की आपने सियासत की. जुल्म [...]

तुलसी का वनवास हो गया

घर टूटे मिट गए वसेरे, महलों में आवास हो गया. ऊँचे कद को देख लग [...]

सरकारी नाखून

चुभते सदा गरीबों को ही, सरकारी नाखून. पट्टी बाँधें हुए आँख [...]

आ तो सही इक बार मेरे गाँव में

आ तो सही इक बार मेरे गाँव में अद्भुत अतिथि सत्कार मेरे गाँव [...]

देश हो रहा शहरी

गाँव ढूंढते ठौर ठिकाना, देश हो रहा शहरी. नहीं चहक अब गौरैया [...]

मुहब्बत होती है

स्वीट कभी नमकीन, मुहब्बत होती है जग में बहुत हसीन, मुहब्बत [...]

चलो फटे में टाँग अड़ाएँ

यार चलो नेता बन जाएँ और फटे में टाँग अड़ाएँ शेयर जैसे [...]

मौन मुझे स्वीकार नहीं है

यदि करना इनकार नहीं है, क्यों करता इकरार नहीं है चुप चुप [...]

शब्द पानी हो गए

छोड़कर हमको किसी की जिंदगानी हो गए ख्वाब आँखों में सजे सब [...]

केवल माँ को ज्ञात

एक कला संसार में, केवल माँ को ज्ञात बिन भाषा बिन बोल के, समझे [...]

माँ और बेटियाँ

पाप अपने कुछ मिटाने चल दिए लोग गंगा में नहाने चल दिए तीर्थ [...]

कोई रिश्ता निभाया जा रहा है

कोई रिश्ता निभाया जा रहा है मुझे फिर से बुलाया जा रहा है [...]

कौन भरेगा पेट -नवगीत

छोड़ा गाँव आज बुधिया ने, बिस्तर लिया लपेट उपजायेगा कौन अन्न [...]

ख्वाब भी तेरा सताता है मुझे

नींद में आकर जगाता है मुझे ख्वाब भी तेरा सताता है मुझे [...]

सूरज पर चढ़ रही जवानी

ओढ़े हुए आग की चादर, करने आया है मनमानी तपा रहा जमकर धरती को, [...]

कितनी करूं पढ़ाई माँ

पहन गले में टाई माँ कितनी करूं पढ़ाई माँ जितना बोझा है बस्ते [...]

जो करो तुम बस करो जी जान से

आपकी झोली भरेगी ज्ञान से. यदि करोगे मित्रता विद्वान से. हाथ [...]

कहाँ बदली गई

(१) कभी घर पर नहीं करते, कभी बाहर नहीं करते किसी भी धर्म की [...]

हमें न पत्थरबाज चाहिए

होना सबका काज चाहिए, हमको ऐसा राज चाहिए जिसे फ़िक्र हो आम [...]

मगर खत्म अपनी कहानी नहीं है

नहीं आज बचपन जवानी नहीं है मगर खत्म अपनी कहानी नहीं है मुझे [...]

मुहब्बत आप करते है

सताया है बहुत हमने, शिकायत आप करते हैं हमारे ख्वाब में आकर, [...]

अब तुम मेरे हाथ खोल दो

अब तुम मेरे हाथ खोल दो करूँ आक्रमण जरा बोल दो पत्थरबाजी [...]

नाम है बस दीप का

जल रही बाती यहाँ पर नाम है बस दीप का आ गयी दीपावली फिर, आस [...]

अप्रैल फूल बनाकर हँस लो

अप्रैल फूल बनाकर हँस लो सबको आज हँसाकर हँस लो रूठा हुआ शाम [...]

अक्षर अक्षर प्रीत लिखेंगे

जब जब कोई गीत लिखेंगे अक्षर अक्षर प्रीत लिखेंगे ग्वाल, [...]

अखिलेश राहुल वार्ता

यू पी चुनाव में हार के बाद प्रश्न अखिलेश का किस मत ने किस्मत [...]