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Author: अवधेश कुमार राय

अवधेश कुमार राय
Posts 19
Total Views 350
मैं अवधेश कुमार राय आप के लिए अपनी रचना लेकर आया हुं, पत्रकारिता के साथ लेख, रचना, कहानी, कविता ,शायरी आप के लिए........ हमारी रचना के लिए संपर्क करें ब्लाग awadhmagadh.blogspot.com.

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

शाम – ए- दिल्ली

अजब सी कैफियत में दिल लिए घुम रहा दिल्ली. शहरी हलचल की [...]

रुका तो था पुरानी चौक पर

जब से गुजरा हुं तेरी गली से. हर सांस याद आ गई. वो मेरी पहली [...]

प्रजातंत्र

अब कौन का तंत्र हैं. कहने को प्रजातंत्र है. मौलिकता की खोज [...]

भुला दो

बहुत चाह हैं, भुला दो. मेरे दिल को तुम दुःखा दो. मेरे एतबार की [...]

रेहनुमा

मेरी पिर तुझें क्यों दिखाई नहीं देती. मेरी हसरतो की खीझ तुझे [...]

सजनी

डुबते सुरज की इस घड़ी में. गोरी ! किस व्यथा के संग. फिर आयेंगे [...]

सनम

कोई खता हो सनम तो केह दो. मेरी तमन्ना को रख दो. बाकौल हो रही [...]

दिल

दिल को थामे रखा हैं. यादों को अंशुमन के धागे में बांधे रखा [...]

मिट्टी मेरे गांव की

मौज रही गलिया चौबारे. वो धुल सनी कच्ची राहे. हवाओं के संग [...]

शिकवा

भुला दो मेरे महबूब. जो गम के सैलाब उठे हो दिल में. खत्म कर [...]

मन का घोषला

मन मोर नहीं बस मन मे मोरे. उङत बहत पनघट पर तोरे. रची सजी मुरत [...]

नई मुक्तक

दिल पर जमी दर्द का एहसास हो गया. मुझे मेरी इश्क का विश्वास हो [...]

अबकी बसंत

आई बसंत की बेला. नभ उपवन में छाई मेला. अमीया पर मंजर ले [...]

घर से दुर

से़ाचा कुछ दिन गांव चलु. घर से दुर आराम करु. खेतों की पगडंडी [...]

तुम वहीं हो

जो तुम दिल की बात कर रहे हो. मेरी हसरतों को गुलजार कर रहे [...]

पलायन

आज के भारत में रोजगार की तलाश में पलायन आम बात हैं, चाहे वो [...]

रिश्तो की विडंबना

कभी - कभी इंसान अपनी महत्वआकांक्षाओं में इतना लिन हो जाता [...]

कफ़न

चमन खिला रहा हुं, बहारों में अमन खिला रहा हुं. कोई मुद्दत [...]

कोयले की कालिख

जब मैं छोटा था, मेरे शहर में कोयले जलाये जाते थे, जलावन के लिए. [...]