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Author: Ashok sapra

Ashok sapra
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

व्यंगात्मक कविता आइये कद्रदान

आइये कद्रदान लेकर आया सियासत की दुकान झोपड़ियां दूंगा तुमको [...]

गजल वो शहर में आकर के

वो गाँव से शहर आया तो मेरे हालात पूछता रहा झूठों की बस्ती के [...]

कत्ल का सामान बनकर

कत्ल का सामान बनकर देखो यूँ ना आया करों अपनी खुशबु से मेरी [...]

गजल राहें इश्क में आये है

राहें इश्क में आये है दोनों हाथ को जोड़कर हजारों उल्फत की कसम [...]

गजल सरहदें क्यों पहचानता नहीं तू

सरहदों को पहचाता नहीं क्यों तु भी परिंदा नादाँ आज जमाने ने [...]

गजल जिंदगी ख़ाक में मेरी

जिंदगी ख़ाक में मेरी ये रकीब मिलाने लगे है सफर आखिरी है [...]

गजल आया हूँ शहर में लेके कुछ किस्से नये पुराने

आया हूँ शहर में किस्से लेकर नये पुराने परेशां चेहरों के लबों [...]

एक गीत शीर्षक वही तू है

मेरा एक गीत उस दोस्त के लिए जो अपने पैसे के घमण्ड में मुझे यह [...]

एक गीत शीर्षक वही तू है

मेरा एक गीत उस दोस्त के लिए जो अपने पैसे के घमण्ड में मुझे यह [...]

गजल तुमको देखा हमको कितने जमाने हो गए

इस शेर के साथ पेश है मेरी गजल उलझा हुआ अब तक जो,वो सवाल है [...]

कविता शीर्षक मेरी ऊँगली पकड़कर बेटा मुझे चलाने वाला

आया कोई मुझको भी तो ,सोती रातों में जगाने वाला मेरे बांगो में [...]

कविता शीर्षक बेटी तू तो है गंगाजल

बेटी तू तो है गंगाजल का बहता हुआ तेज प्रवाह तू जीवन में तो [...]

कविता शीर्षक बीज डाले बेटो के पर बेटी तू उग आये

तुझसे है अनोखा रिश्ता मन को ये हम समझाये हमने बीज डाले बेटो [...]