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Author: ashfaq rasheed mansuri

ashfaq rasheed mansuri
Posts 24
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

ना जाने कितनी थकानों के बाद निकले हैं,,

न जाने कितनी थकानों के बाद निकले हैं। ये रास्ते जो ढलानों के [...]

ज़माने भर को मेरा सर,,,

ज़माने भर को मेरा सर दिखाई देता है, हर इक हाथ में पत्थर दिखाई [...]

जब से हमारे पाँव, रक़ाबों में आ गए,

21 जुलाई 2015 ========== जब से हमारे पाँव रकाबों में आ गए, जितने भी [...]

गली मुहल्लों से लश्कर निकालने वाले,

गली मोहल्लों से लश्कर निकालने वाले, डरे हुवे हैं बहुत डर [...]

बेशक सेहत मंदों को बीमार लिखो,

बेशक सेहतमंदों को बीमार लिखो, लेकिन अक़्ल के अंधोँ को [...]

पहले तो मुहब्बत में गिरफ़्तार किया है,

पहले तो मुहब्बत में गिरफ़्तार किया है फिर पुश्त के पीछे ही [...]

उम्मीद अपनी क्या करें,,,

उम्मीदें अपनी क्या करें, जज़्बात क्या करें, अपने ही बस में जब [...]

तू अगर हे बहुत ख़फ़ा मुझ से,,,

==========ग़ज़ल============ तू अगर है बहुत ख़फ़ा मुझ से! कैसे रखता है राब्ता [...]

तेरी नज़र के इशारे बदल भी सकते हैं,,

======ग़ज़ल===== तेरी नज़र के इशारे बदल भी सकते हैं, मेरे नसीब के [...]

बरसों से,,,,,

बरसों से यक्सर* हमारे पीछे है, अनजाना इक डर हमारे पीछे [...]

जो मेरे साथ था,ज़िन्दगी की तरह,,

जो मेरे साथ था ज़िन्दगी की तरह, अब वो लगने लगा अजनबी की [...]

हैरत है,,,,

हैरत है,वो खून की बातें करते हैं, जो अक्सर कानून की बातें [...]

गले में हाथ डाले जायेंगे अब,,

गले मे हाथ डाले जाएंगे अब, छुपे खंज़र निकाले जाएंगे अब, सुना [...]

में जिसे आज तक ना कह पाया,,

में जिसे आज तक ना कह पाया। उसने वो बात ट्वीट कर दी है।। जो [...]

दमागों दिल में हलचल हो रही है,

दमागो दिल मै हलचल हो रही है. नदी यादों की बे कल हो रही है. तू [...]

दुनिया को हादसों में,,

दुनिया को हादसों में गिरफ़्तार देखना। जब देखना हो दोस्तों [...]

किसी कबीले ना सरदार के भरोसे हैं,

किसी कबीले ना सरदार के भरोसे हैं। सर अपने आज तलक दार के भरोसे [...]

अपने दिल में आग लगानी पड़ती है,

अपने दिल में आग लगानी पड़ती है। ऐसे भी अब रात बितानी पड़ती [...]

अपनी ग़ज़लों को,,

अपनी ग़ज़लों को रिसालों से अलग रखता हूँ, यानी ये फूल ,किताबों [...]

दुश्मनों के नगर में,

दुश्मनों के नगर में घर रखना। उसपे ऊँचा भी अपना सर [...]

फ़लक़ से मिस्ले परिंदा,,

फ़लक से मिस्ले परिंदा उतर भी सकता है। तू जिस अदा से उडा था उतर [...]

सितमगरों की लिखी,

सितमगरों की लिखी दास्तान बोलेंगे। हमारे घाव के जिस दिन [...]

ज़मीं पर नीम जां यारी पड़ी है,

ज़मी पर नीमजाँ यारी पड़ी है। इधर खंजर उधर आरी पड़ी है।। मेरे ही [...]

शेर

कई मदारी परचम ले कर निकले हैं, बस्ती में दो-चार मदारी आने [...]