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Author: अरविन्द दाँगी "विकल"

अरविन्द दाँगी
Posts 17
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जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

क्रोंच विरह से निकली कविता,हर उर की भाषा बन आयी हो…

क्रोंच विरह से निकली कविता,हर उर की भाषा बन आयी हो। मन के [...]

टूटकर बिखरना अब तज भी दो यार…

टूटकर बिखरना अब तज भी दो यार... खिलकर सिकुड़ना अब छोड़ो भी [...]

ये रंगों का महापर्व खुशियां फिर ले आएगा…

ये रंगों का महापर्व खुशियां फिर ले आएगा... भूल न जाना अपनेपन [...]

क्यों न होली इस बार हम कुछ यूं मनाये…

क्यों न होली इस बार हम कुछ यूं मनाये, जो बिछड़े थे हमसे कभी [...]

हाँ मै हूँ कलम…मुझको तो हर पल लड़ना होगा…

हाँ मै हूँ कलम…मुझको तो हर पल लड़ना होगा… न झुकना होगा न दबना [...]

हा बन सको तो बनो महावीर की बेटियों से तुम जाने जाओ…

जीवन में अधिकारों की सीमा में उनको बांध दिया... बेटी है कहकर [...]

नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो…

नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो... नारी तुम अबला [...]

होली ये ख़ुशनुमा लम्हो को फिर सजाने का मौसम है..

पलाश के फूलों के महकने का मौसम है.. रंगो के संग खुशियों से [...]

हर रात मै शिव से मिलता हूँ…

"हा हर रात मै शिव से मिलता हूँ... बंद आँखों में ताण्डव रचता [...]

ये साल नया सा ऐसा हो…

ये साल नया सा ऐसा हो,,,खुशियो से भरा भरा सा हो.... गम के आँसू न [...]

मै अपनी कलम से अपना किरदार लिखता हूँ…

जैसा हूँ... मै वैसे विचार लिखता हूँ... मै अपनी कलम से अपना [...]

तब तब शिव ताण्डव होता है…

जब देश सोया सोया सा रहता है... युवा कमरे में खोया रहता [...]

हा ये सच है कि गाँधी फिर आ नहीं सकते अहिंसा का पाठ पढ़ाने को…

हा ये सच है कि गाँधी फिर आ नहीं सकते अहिंसा का पाठ पढ़ाने [...]

चल रहा चुनावी महासमर शब्दों के बाण से…

चल रहा चुनावी महासमर शब्दों के बाण से... लग रहा पुरज़ोर यूपी [...]

क्यों न होता यहाँ इक साथ चुनाव..?

बड़ा अज़ीब सा हाल है मेरे देश का... कभी यहाँ चुनाव...कभी वहाँ [...]

करो तो कुछ ऐसा की बेटियों से तुम पहचाने जाओ यार…

न कहो अब छुईमुई सी होती है बेटियाँ... न समझो अब की कमज़ोर होती है [...]