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Author: arti lohani

arti lohani
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कोई शख्स पराया नहीं।

कोई शख्स जग में पराया नहीं। अब तक किसी ने बुलाया नहीं। मैं [...]

मदहोश

तेरी ऊँगलियों की शरारत, मुझे मदहोश करने लगी. तेरी साँसों की [...]

हमसफर तुम

इस सफ़र के नये हमसफर तुम हो, कि अब तो हर जनम के हमसफर हो [...]

तन्हाई

तन्हा बैठी थी तन्हाई मैं, याद उनकी आई तन्हाई मैं. तुम कहाँ और [...]

कैसी ये रीत

आज डोली विदा हो रही है आज बेटी बहू बन रही है कल तक थी जिगर का [...]

मेरा गाँव

चलो ले चलूँ तुम्हें हसीन वादियों में, इस आपाधापी से दूर [...]

मैं नारी हूँ

मैं ममता की शीतल छाँव हूँ,तो सूरज की तपिश भी. निर्मल अविरल नदी [...]

बेटियाँ

हरमन को मनभावन लगती हैं बेटियाँ, माँ पिता के दिल में बसती हैं [...]

अजब ये प्रीत है.

धरती प्यासी है मिलन को अपने अंबर से, अंबर भी बेकरार है प्रणय [...]

कागज की कश्ती

भेजकर उसने कागज की कश्ती बुलाया है समन्दर पार मुझे वो नादाँ [...]

ओ अजनबी…

ओ अजनबी क्या तुम सचमुच अजनबी हो? वक्त-बेवक्त आ जाते हो [...]

रुह को रुह में उतरने दो

आज लबों को बोलने की इजाज़त नहीं आंखो को ये काम करने दो करीब आ [...]

कौन हो तुम

कौन हो तुम जो चुपके से अंदर चले आ रहे हो कौन हो तुम जो बिन [...]