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Author: arti lohani

arti lohani
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

सामंजस्य दिलदिमाग और जिस्म के बीच

कैसे सामंजस्य बिठाती होगी दिल,दिमाग और जिस्म के बीच कैसी [...]

सामंजस्य दिलदिमाग और जिस्म के बीच

कैसे सामंजस्य बिठाती होगी दिल,दिमाग और जिस्म के बीच कैसी [...]

माँ देती दुआएं हैं

ग़ज़ल ---- सुहाना है ये मौसम हर तरफ फैली लताएं हैं। ये बेलें [...]

जिंदगी के मोड़ पर

जिंदगी के मोड़ पर बालों में चांदी दांतों में सोना आ गया उम्र [...]

गंगा बचानी है

ग़ज़ल---- शिकायत कुछ नहीं तुमसे, मगर इतना बता दो तुम। जुदा हम [...]

मुहब्बत हुई श्याम से

सब काम हुए आराम से । जब मुहब्बत हुई श्याम से ।। कैसे कहूँ मैं [...]

हुई मुहब्बत श्याम से

सब काम हुए आराम से । जब मुहब्बत हुई श्याम से ।। कैसे कहूँ मैं [...]

नारी

नारी का तन । नहीं कोई वस्तु । पवित्र मन ।। माँ का प्यार । कम [...]

एक किताब लिखूं

सोचा एक किताब लिखूं। उसमें तेरा जिक्र लिखूं। सुबह से शाम [...]

बेटी का ससुराल

पीहर आयी बेटी से पिता ने पूछा, उसकी उदासी का कारण माँ ने [...]

याद न होती

इक बस तुमको पाया होता जहां क़दम में सारा होता यादें न होती [...]

ख़ामोशी

बहुत ही तेज होती हैं ये ख़ामोशी की आवाजें। दिलों को चीर देती [...]

बोल माँ

कैसे तुझे पुकारूँ मॉ ( कविता) -- आरती लोहानी कैसे तुझे पुकारूँ [...]

अरमानों के कफ़न

चहुँओर दनुजता क्रूर भाव ले टहली! मानवता की, दी कमर, तोङ दी [...]

बोलो माँ

कैसे तुझे पुकारूँ मॉ ( कविता) -- आरती लोहानी कैसे तुझे पुकारूँ [...]

हिंदी मेरी जान

अंनन्त काल से अविरल बहते हुए, सदियों से यूँ ही निरंतर चलते [...]

मुझको बता दे

मेरा दिल परेशां करूँ क्या बता दे। कहाँ जा के रोऊँ वहाँ का पता [...]

किताब

सोचा एक किताब लिखूं। उसमें तेरा जिक्र लिखूं। सुबह से शाम [...]

प्रकृति

शिखरिणी छंद । सघन वन । खोते अस्तित्व । भीगे नयन ।। कैसे हो [...]

धरती अम्बर

धरती प्यासी है मिलन को अपने अम्बर से, अम्बर भी बेक़रार है [...]

प्रेम

प्रेम क्या है? समर्पण मात्र या अर्पण। प्रेम भावों का तीव्र [...]

प्रकृति

शिखरिणी छंद । सघन वन । खोते अस्तित्व । भीगे नयन ।। कैसे हो [...]

वो एक नदी

हिमखंडों से पिघलकर, पर्वतों से उतरकर, खेत-खलिहानों को [...]

ख्वाइशें

ख्वाइशों का खिला आसमान है, दुआओं के उठे हजारों हाथ भी, एक भी [...]

ख्वाहिशें

ख्वाइशों का खिला आसमान है, दुआओं के उठे हजारों हाथ भी, एक भी [...]

कुछ नही पहले सा

इस शाख तो कभी उस शाख उड़ती थी पहले खत्म होती धरा में अब उदास सी [...]

रोटी की जद्दोजहद

दो रोटी की जद्दोजहद में । सुबह से रात हुई ।तलाशने निकले घर से [...]

कागज की कश्ती

किसी ने भेजकर कागज की कश्ती बुलाया है समन्दर पार मुझे. वो [...]

मानसून

आयी बरसा। उदास किसान का । मन हरषा ।। आग का गोला । देता है ये [...]

क्या उत्तर दोगे ज़माने को

उदासी थी सिसक रही, मेरे ही लफ्जों में। जैसे की मैं दफ़्न हूँ [...]