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Author: Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

चार दिनों की ज़िंदगी , खेले कैसे खेल

22-10-2017 आज मिला ऐसा सबक, टूट गईं सब आस जीने का कोई सबब , रहा न कोई [...]

जलाकर दिये चाँद को भी रिझाओ

जलाकर दिये चाँद को भी रिझाओ अमावस को पूनम के जैसा बनाओ [...]

“अर्चना’ यूँ दिवाली मनायें चलो

अपनी माटी के दीपक जलायें चलो तेल बाती जला तम भगायें चलो हम [...]

दिखते हैं खामोश मगर हम अंदर अंदर बिखरे हैं

दिखते हैं खामोश मगर हम अंदर अंदर बिखरे हैं इस दिल में तो जगह [...]

रावण

आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ ************ रावन पर था [...]

पेड़ चुपचाप आँसू बहाते रहे

काट जंगल नगर हम बसाते रहे पेड़ चुपचाप आँसू बहाते रहे पेट [...]

कुर्सियाँ अपनी लेकर किधर जाएंगे

कुर्सियाँ अपनी लेकर किधर जाएंगे ये तो नेता हैं खुद ही उतर [...]

आँसू

आँसू मन का कर गए, सीधा सा उपचार खारे पानी मे बहे, मन के सभी [...]

श्राद्ध

श्राद्ध पक्ष आया है फिर से कौओं ने इक सभा बुलाई घर घर की [...]

शिक्षक दिवस पर कुछ विधाता छंद पर मुक्तक

1 किताबी ज्ञान ही केवल, नहीं शिक्षक सिखाता है कमी अच्छाई [...]

ढ़ोंगी बाबा

दो कुंडलियां ********* 1 आशा सँग गुरमीत भी, काट रहा है जेल बाबाओं [...]

मिलने का कोई सिलसिला न हुआ

मिलने का कोई सिलसिला न हुआ दिल ये यादों से पर रिहा न [...]

वक़्त के सँग ही कदम अपने मिलाते रह गये

वक़्त के सँग ही कदम अपने मिलाते रह गये कारवां बस यादों का हम [...]

वतन के लिये वीरता से लड़ा है

वतन के लिये वीरता से लड़ा है तिरंगे में अब शांत लिपटा पड़ा [...]

जिओ इस तरह तुम वतन के लिये

सितारे ज्यूँ चमकें गगन के लिये जिओ इस तरह तुम वतन के लिये न [...]

पर्व राष्ट्रीय जब भी आते, यूँ तो सभी मनाते हैं

पर्व राष्ट्रीय जब भी आते, यूँ तो सभी मनाते हैं पर ऐसा लगता है [...]

आंखों को हमसे और रुलाया न जाएगा

आंखों को हमसे और रुलाया न जाएगा दिल का इलाज ऐसे कराया न जाएगा [...]

बिरले ही बनते यहाँ , तुलसी सूर कबीर

1 घिस घिस कर पाषाण पर, हिना बिखेरे रंग तभी चमकते हम यहाँ,सहें [...]

भैया आतीं याद पुरानी वो बातें

भैया आती याद पुरानी वो बातें बचपन में करते थे रोज खुराफातें [...]

तुमसे मिलने आयेंगे, पर किसी बहाने से

तुमसे मिलने आयेंगे, पर किसी बहाने से अब नहीं डरेंगे हम, देखना [...]

घिरें काली घटायें जब,मचलने लगता है सावन

घिरें काली घटायें जब,मचलने लगता है सावन तभी पानी की बूंदे [...]

मुश्किलें हैं आज कितनी आदमी के सामने

मुश्किलें हैं आज कितनी आदमी के सामने जैसे इक टूटा दिया हो [...]

ये दरिया गम का कम गहरा नहीं था

ये दरिया गम का कम गहरा नहीं था हमें फिर भी डुबो पाया नहीं [...]

देखो आई बरखा रानी

एक बाल गीत *********** देखो आई बरखा रानी काले काले छाये बादल जैसे [...]

मेरा श्रृंगार हो गईं ग़ज़लें

02-07-2017 मेरा श्रृंगार हो गईं ग़ज़लें तीज त्यौहार हो गईं ग़ज़लें [...]

रँग यहाँ अपना जमाया है बहुत दिन हमने

रँग यहाँ अपना जमाया है बहुत दिन हमने राज अपना भी चलाया है [...]

जब जब तुम्हें पुकारा, घनश्याम हे मुरारी

दिग्पाल छंद पर आधारित एक गीत ********************* जब जब तुम्हें [...]

खुद से मिलने की दिल में हसरत है

खुद से मिलने की दिल में हसरत है पर मिली आज तक न फुरसत है [...]

उनको अपना बना के देख लिया

उनको अपना बना के देख लिया जख़्म दिल के दिखा के देख लिया फूल [...]

चाहें कितना भी तुम हमसे शिकवा करो

चाहें कितना भी तुम हमसे शिकवा करो पर न खामोशियों को यूँ ओढ़ा [...]