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Author: Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान

शत शत नमन हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान राजगुरु [...]

भूल तो होती रहे इंसान से

भूल तो होती रहे इंसान से पर खफा सा वो रहे भगवान से उम्र में [...]

चाँद ने फिर आज देखो

ओट में खुद को छिपाया चाँद ने फिर आज देखो रात का घूँघट उठाया [...]

सभी मित्रों को रंगपर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं

रंगीन परिन्दों ने आकाश सजाया है , श्रृंगार धरा का भी हर मन को [...]

होली

बंदर जैसा मुख हुआ, गर्दभ जैसी चाल रंगो ने मिल भाँग से , ऐसा [...]

नारी

नारी के इस दर्द को , कौन सका पहचान जननी होकर सृष्टि की, मिला [...]

नारी का उत्थान

अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस की हार्दिक बधाई नारी के उत्थान [...]

नेता हिंदुस्तानी

रीत नहीं छोड़ी है अपनी सुनो पुरानी अब भी करते रहते है वोटों की [...]

मौसम ने भी रँग भरे , लिए पृष्ठ अब खोल

मौसम ने भी रँग भरे , लिए पृष्ठ अब खोल कानों में गूँजे मधुर [...]

आधार छंद–मुक्तामणि (दोहा मुक्तक)

1 हँसते रोते ज़िन्दगी, अपना समय बिताती मुश्किल राहों से हमें , [...]

शंकर आदि अनंत

शंकर आदि अनंत, अविनाशी नित्यानन्द, आशुतोष महाकाल ,शिव ही [...]

मुक्तक –आधार छंद दोहा

1 सावन सूखा ही गया, देखा पहली बार खोया रूप बसंत का ,कैसी चली [...]

आया देखो मधुमास,

आया देखो मधुमास,घोले मन में मिठास,प्रीत झाँक अँखियों में , [...]

मत्तागयन्द/मालती छंद

1 मौसम आज करे मदहोश बयार चली बहकी बहकी सी घूँघट खोल रही [...]

सदा प्यार में उनसे हारा करेंगे

सदा प्यार में उनसे हारा करेंगे जिता कर उन्हें यूँ हराया [...]

दर्द जब भी यहाँ रुलाते हैं

दर्द जब भी यहाँ रुलाते हैं आस आँसू हमें बँधाते हैं ये [...]

राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो

राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो क्यों न हार का [...]

होते यहाँ चुनाव के ,ऐसे सुनो प्रचार

भाषण में सब कर रहे, तीखे तीखे वार होते यहाँ चुनाव के ,ऐसे सुनो [...]

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है पिला गम की हाला ग़ज़ल हो रही है [...]

हम सबको ही है पता, चुभ जाते हैं शूल

हम सबको ही है पता, चुभ जाते हैं शूल लेकिन अक्सर घाव भी,दे जाते [...]

मिलने के ही साथ में ,देखो जुड़ा विछोह

मिलने के ही साथ में ,देखो जुड़ा विछोह दुख होता उतना बड़ा, जितना [...]

मदिरा सवैया छंद

मुक्तक 1 याद पिया तुमको करके बरसी अँखियाँ इस सावन में यूँ [...]

मतदान पर दोहे

लोकतंत्र का है यही, हम सबको पैगाम अपना मत देकर सही, करें देश [...]

यूँ हटाये हैं घिरे दिल के अँधेरे हमने

यूँ हटाये हैं घिरे दिल के अँधेरे हमने दीप अश्कों से भरे और [...]

तुम्हें खुशियों भरा आँगन,मुबारक हो मुबारक हो

तुम्हें खुशियों भरा आँगन,मुबारक हो मुबारक हो बरसता नेह का [...]

जहाँ फूल बिखरे हुए ज़िन्दगी में

जहाँ फूल बिखरे हुए ज़िन्दगी में वहीँ काँटे भी हैं छिपे [...]

धूप खिली है आज धरा मुस्काई है

एक मुक्तक ******** धूप खिली है आज धरा मुस्काई है ठिठुरन से भी राहत [...]

मात सरस्वती

हम पर मात सरस्वती, करना कृपा अपार जीवन में हरदम रहे, खिली [...]

माँ शारदे माँ शारदे

तू भूल मेरी कर क्षमा खुशियों भरा संसार दे माँ शारदे माँ [...]

रंग बसंती जब खिलते हैं

रंग बसंती जब खिलते हैं नैनों से सपने झरते हैं कूक रही [...]