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Author: Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta
Posts 233
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

गुल खिलते हैं पर उनको खिलकर मुरझाना पड़ता है

गुल खिलते हैं पर उनको खिलकर मुरझाना पड़ता है काँटों में रहते [...]

तुम साथ हो तो वक्त भी क्या खास होता है

तुम साथ हो तो वक्त भी क्या खास होता है वरना कदम भी मील का [...]

रिश्ता माँ बेटी का

खुद माँ बन कर जाना माँ होने का अहसास माँ और ज्यादा [...]

आज परदा हटा दीजिये

आज परदा हटा दीजिये बात दिल की बता दीजिए कीजिये दूर दिल से [...]

केदारनाथ त्रासदी पर मेरे व्यथित मन के कुछ उद्गार

केदारनाथ त्रासदी के बाद यात्रा खुलने पर जब मेरा केदारनाथ [...]

बेटियाँ

पास रहती हमेशा नहीं बेटियाँ पर न माँ बाप को भूलतीं [...]

माँ

माँ जनम दिया तुमने हमें , दिखलाया संसार और लुटाया माँ सदा , [...]

एक पौधा बिटिया के नाम

जन्म हुआ जब बेटी का तब, इक पौधा लगवाया था उसको मुरझाने नहीं [...]

विजात छंद

सुनो माँ प्रार्थना मेरी न भटके भावना मेरी रहूँ बचकर बुराई [...]

काले मेघा जब तुम आना

काले मेघा जब तुम आना छत पर मेरी भी आ जाना अपनी शीतलता से कुछ [...]

हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान

शत शत नमन हँसते हँसते जान भी, अपनी की कुर्बान राजगुरु [...]

भूल तो होती रहे इंसान से

भूल तो होती रहे इंसान से पर खफा सा वो रहे भगवान से उम्र में [...]

चाँद ने फिर आज देखो

ओट में खुद को छिपाया चाँद ने फिर आज देखो रात का घूँघट उठाया [...]

सभी मित्रों को रंगपर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं

रंगीन परिन्दों ने आकाश सजाया है , श्रृंगार धरा का भी हर मन को [...]

होली

बंदर जैसा मुख हुआ, गर्दभ जैसी चाल रंगो ने मिल भाँग से , ऐसा [...]

नारी

नारी के इस दर्द को , कौन सका पहचान जननी होकर सृष्टि की, मिला [...]

नारी का उत्थान

अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस की हार्दिक बधाई नारी के उत्थान [...]

नेता हिंदुस्तानी

रीत नहीं छोड़ी है अपनी सुनो पुरानी अब भी करते रहते है वोटों की [...]

मौसम ने भी रँग भरे , लिए पृष्ठ अब खोल

मौसम ने भी रँग भरे , लिए पृष्ठ अब खोल कानों में गूँजे मधुर [...]

आधार छंद–मुक्तामणि (दोहा मुक्तक)

1 हँसते रोते ज़िन्दगी, अपना समय बिताती मुश्किल राहों से हमें , [...]

शंकर आदि अनंत

शंकर आदि अनंत, अविनाशी नित्यानन्द, आशुतोष महाकाल ,शिव ही [...]

मुक्तक –आधार छंद दोहा

1 सावन सूखा ही गया, देखा पहली बार खोया रूप बसंत का ,कैसी चली [...]

आया देखो मधुमास,

आया देखो मधुमास,घोले मन में मिठास,प्रीत झाँक अँखियों में , [...]

मत्तागयन्द/मालती छंद

1 मौसम आज करे मदहोश बयार चली बहकी बहकी सी घूँघट खोल रही [...]

सदा प्यार में उनसे हारा करेंगे

सदा प्यार में उनसे हारा करेंगे जिता कर उन्हें यूँ हराया [...]

दर्द जब भी यहाँ रुलाते हैं

दर्द जब भी यहाँ रुलाते हैं आस आँसू हमें बँधाते हैं ये [...]

राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो

राहों की शिकायत क्यों मंज़िलों से करते हो क्यों न हार का [...]

होते यहाँ चुनाव के ,ऐसे सुनो प्रचार

भाषण में सब कर रहे, तीखे तीखे वार होते यहाँ चुनाव के ,ऐसे सुनो [...]

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है

इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है पिला गम की हाला ग़ज़ल हो रही है [...]

हम सबको ही है पता, चुभ जाते हैं शूल

हम सबको ही है पता, चुभ जाते हैं शूल लेकिन अक्सर घाव भी,दे जाते [...]