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Author: aparna thapliyal

aparna thapliyal
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मेरा पुनर्जन्म

आज भी .याद है वो पल मुझको अपनी कोख से जब जाया था तुझको उस वक्त [...]

सौभाग्य” (लघु कथा)

आज बेटे की ईन्जिनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने पर उसके [...]

मनभावन सावन

१ बूँदों का नृत्य सोंधी मिट्टी महकी हवा बहकी । ##################### [...]

अहसास

जुबाँ खा़मोश रहकर भी सभी कुछ बोलती है मगर बस शर्त ऐसी है कि [...]

विधाता की पाती

तितली और खगकुल रंगों के ऐसे गुरुकुल अप्रतिम सुन्दरता [...]

सुनो बलात्कारी

सूरज भी खुश नहीं आग बरसा रहा निर्लज्ज निकम्मों को सबक देना [...]

कश्मीर का दर्द-२

शहीद ले.उमर फैयाज़ को समर्पित (५ हाइकु) १ झेलम तीरे पहले [...]

छोटी छोटी बातें

पानी आँखों के समंदर मे हहराता खारा पानी निशब्द रह कर भी सुना [...]

बेटी

सुगंधा को आज पहली बार महसूस हुआ कि वो अवांछनीय ,अकेली नहीं [...]

करनी और भरनी

आज पुराने घर के आँगन में अकेली निस्सहाय बैठी शगुन के हृदय में [...]

शाईलक के भतीजों, धुआँ

"शाईलक के भतीजों" काली बिल्ली बनकर रास्ता काट लो बन जाओ बन्दर [...]

मुग्धा

कलियों से कोमलता पाई लचक वल्लरी से आई गात महकती फूलों [...]

“दण्ड”

नयन आज बहुत खुश था,उसके तेरहवें जन्मदिवस पर मामाजी उपहार में [...]

ओस

पत्तों पर ठहरी ओस की बूँदें नाजुक हल्की सी हवा से [...]

” सरप्राइज़”

सुबह सुबह सबको यथास्थान दफ्तर,स्कूल भेजकर निवृत हुई तो सोचा [...]

कश्मीर का दर्द (५ हाइकु)

#१ सेब के फूल सुगन्धित सजीले मस्तक शूल । ***************************** [...]

“विडम्बना”

देवालय में स्थापित पाषाण कृति पूजित होती नित नतमस्तक [...]

शब्दों का खेला

"शब्दों का खेला" शब्द हथियार है ं बेसोचे उछाल दो तो दोधारी [...]

“रक्षा कवच”

सत्या के अति इमानदार पिता यूँ तो सरकारी महकमें में [...]

‘ पितृ भोज’

१९८८ में मैं नई नई, दिल्ली शहर में रहने आईं थी.मन मे राजधानी की [...]

“मेरे लिए”

ज़िदगी नें कुछ यूँ साथ निभाया है मेरी किस्मत देख कर सूरज [...]

“मुक्ति”

किसी के प्यार का मोती हूँ किसी के नेत्रों की ज्योति हूँ नज़र [...]

“सरफरोश दीवाने”

सर फरोशी की तमन्ना ले कर दीवाने चल पड़े थे मादरे वतन को [...]

” नीला”

नीले का है विस्तार वृहद समझेगा कोई क्या ? अनहद! अम्बर [...]

वो थकी आँखें

शून्य में निहारती वो थकी आँखें ज्यों ढूँढती हों समय के साथ [...]

“कोलाहल या हलाहल”

यह कोलाहल कैसा है बिल्कुल हलाहल जैसा है पिघला सीसा सा [...]

ओस

पत्तों पर ठहरी ओस की बूँदें नाजुक हल्की सी हवा से [...]

_” आतंकवाद से त्रस्त मन की पुकार “

मुझे नई सुबह की तलाशहै रात के अँधेरे में आग के घेरे में जल [...]