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Author: ANURAG Singh Nagpure

ANURAG Singh Nagpure
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मन

मन से मन के दीप जला लो मन से मन को फिर महका लो मन से मन का मेल जो [...]

कभी कभी शाम कुछ ….

कभी कभी शाम कुछ ऐसे कहीं होती है, जैसे तुम्हारी याद आसमां [...]

शाम..।

कभी कभी शाम कुछ ऐसे कहीं होती है, जैसे तुम्हारी याद आसमां [...]

नज़्म..

सोचता हूँ... दोनो आस्तीनों के सहारे लटके, मज़बूरियों का बैग [...]

गज़ल

कैसी समस्या है कि कोई हल नही निकलता क्यों अर्जुन के तीर से भी [...]

गजल..

तनहाई में वो अक्सर पास में रहता है, कुछ यादों का उजाला रात में [...]

गजल..

जिन्दा रहने के लिये कौन सा शहर अच्छा है, जलता हो आसमां तो कौन [...]