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Author: अनुजा कौशिक

अनुजा कौशिक
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मैं एक प्रोफ़ेश्नल सोशल वर्कर हूं..ज़िन्दगी में होने वाले अनुभवों और अपने विचारों की अभिव्यक्ति अपने लेखों और कविताओं के माध्यम से कर लेती हूं..

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

दिवाली को मैंने बस यूं अकेले मनते ही देखा है

मैंने अब रिश्तो में कटुता देखी है मन में कुंठा दिलों में [...]

लड़की नहीं है कोई चीज़

एक नाज़ुक सी कोमल सी इतराती लड़की. अनजान इस बात से कि अपने ही [...]

*शराफ़त नहीं है कमज़ोरी*

शराफ़त का घुट घुट कर मरते जाना धोखे का यूं बस मचलते ही [...]

जीना इसी का नाम है

ज़िन्दगी दो पल की ये कभी समझ नहीं आयी काश ऐसा होता..काश वैसा [...]

*ये जीवन बड़ा अनमोल है*

हे मानव ! ये जीवन बड़ा अनमोल है चिन्ता कैसी करे है पगले ये [...]

*ढलती उम्र और बुढ़ापे की दहलीज़**

तेरी ढलती उम्र और बुढ़ापे का ज़िक्र तू न डर इंसान..अब ये कैसी [...]

*मेरा भारत महान..जय मेरा हिन्दुस्तान*

गर्व है तुझपे हे भारत माँ सुसंस्कृति की तू प्यारी जननी [...]

*माता पिता और संतान के बीच घुटते-मरते रिश्ते*

*माता पिता और संतान के बीच घुटते-मरते रिश्ते* अक्सर सोचती [...]

*ज़िन्दगी की कशमकश*

बड़ी मुश्किल है ये ज़िंदगी.. दिल चाहे है फिर से बच्चा बन [...]