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Author: Dr.Nidhi Srivastava

Dr.Nidhi Srivastava
Posts 55
Total Views 924
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

“हम चलते रहे”

कितने ठहराव रहे जिन्दगी के मगर हम चलते रहे। देख साहिल दूर [...]

“चलो ना”

चलो ना कुछ सपनों में रंग भरें, सोंधी -सोंधी सी खुशबू लिये, रेत [...]

“बाहर क्यों सन्नाटा है”

मन में इतना शोर मचा है, बाहर क्यों सन्नाटा है। गहरे दरिया में [...]

“शब्दऔर समर्पण”

है मेरे पास इक दरिया खामोशी का , और कुछ शब्द न्योछावर हैं तुम [...]

“चलो मोड़ दो एक बार फ़िर”

चलो मोड़ दो एक बार फ़िर मेरी ज़िंदगी के गीले पन्नों को बहुत [...]

“मन की वीना सुनोगे कभी तुम”

मन की वीना सुनोगे कभी तुम , तार -तार झंकृत हुआ ये मन | सरगम सी [...]

“कोमल सेजों पर सोए सपने “

कोमल सेजों पर सोए सपने , जब अंगार बन जाते हैं . एक चिंगारी [...]

“ऐ चाँद !ना हँस मेरी तन्हाई पर “

ऐ चाँद ! ना हँस मेरी तन्हाई पर , तू भी अकेला है मेरी तरह | तेरी [...]

“सपनों के खंडहर में “

सपनों के खंडहर में , एक लता बेल की, आज लहरा रही है , अंतहीन उमंग [...]

ऐ ! तिमिर

दूर हो जा ऐ ! तिमिर, देख मैने दीप सजाये, झिलमिल रोशनी ने, तेरे [...]

“अलसाती सुबह”

देखो मुख मंजीर में ढाकें, मतवाली, मदिरगामिनी, धूप की चादर को [...]

“खो गये उन्मुक्त दिन “

क्यों खो गये वो उन्मुक्त दिन , बरबस आँखों में उमड़ गये , निज [...]

“शब्दों से हारी लो आज मैं “

शब्दों से हारी लो आज मैं , अवतरित हो मेरी कलम से, बह चली जो [...]

“सब व्यर्थ, यहीं रह जाना है “

कुछ अनकही, कुछ अनसुनी है ये जिन्दगी बडी अनबुझी कुछ अनछुयी , [...]

” आशा दीप “

संध्या ऊषा का सम्बल खोकर , नीरवता में डूब जाती , फ़िर भी जग हेतु [...]

“जय हिंद से करूँ वन्दना”

"जय हिंद " मेरे वीर सिपाही बोलो , किन शब्दों में करूँ वन्दना | [...]

“कोमल से एहसास”

शब्दों की भींड में अकेली खडी, मैं हूँ नर्म - कोमल से एहसास [...]

“मेरे जीवन की स्वर्णप्रभा”

अभी अभी तो आयी है , मेरे जीवन की स्वर्णप्रभा, अलसायी [...]

“तुम शब्द बन कर आ गये”

तुम्हे ही तो लिख रही थी कि तुम शब्द बन कर आ गये, शान्त स्निग्ध [...]

“राग द्वेष से सुदूर चले”

चलो निदारुण शब्दों की भींड से निकल कर , निनादित मौन के संग [...]

“गीत सुनाओ जीवन के”

आओ बैठो क्षण दो क्षण , सुनो सुनाओ पल दो पल, जीते क्यों हो [...]

“बच्चे “

जो कोरे कागज सी खुशबू लिये सुबह सुबह बस्तों का बोझ लिये नये [...]

“पुष्प”

कुछ पुष्प होते हैं ऐसे , निशा काल में हैं खिलते | एकाकी तो होते [...]

“मन की सिलवटें “

ये जो मन की सिलवटें हैं , कई स्वप्न वहीं पड़े हैं , ये सीपी-सीपी [...]

“ओस”

छूना नहीं आकर मुझे , मैं भीगी रात की ओस हूँ , कतरा -कतरा बिखर [...]

“साँझ”

सुरमई सांझ, सुवासित सुमन, सुमधुर गीत, भ्रमरों का [...]

“स्वप्न”

स्वप्न बेपरवाह होते हैं, अनियमित होते हैं. स्वप्न खंडित [...]

“हाँ मैनें देखा है “

सत्य को हारते देखाहै, दर्द को जीतते देखा है, वक्त को बदलते [...]

“बीता पल”

वो पल ,जो था कल , कितना प्यारा था, कितना न्यारा था| बीत गया जो [...]

“सभ्यता और संस्कार”

यूँ सभ्यता को लुटने न दो, यूँ सत्यता को मिटने न दो, यूँ कल्पना [...]