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Author: Anju Gupta

Anju Gupta
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Am a management professional with 20 years of rich experience. Working as a softskill Trainer Writing is my passion.

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

खुद को बदलने की कशमकश

अक्सर और आदतन, निद्रा के आगोश में जाने से पहले, ले बैठती [...]

अच्छा लगता है…

इक खामोशी अक्सर फैल जाती है हम दोनों में कभी -कभी ... इक दूजे [...]

तू संग मेरे रहता है…

तेरे ख्यालों में... गुजरने लगे हैं, रात और दिन ! तू पास हो न हो, [...]

क्या है कोई राम

क्या है कोई राम ? ? ? ***************** कितनी अहिल्या जीती जागती बनीं [...]

मर्यादा

मर्यादा क्यों मर्यादा की... चादर ओढ़े, दिन-रात यूँ ही... घुट [...]

कविता : आजकल हम बेवजह मुस्कुराने लगे हैं

जिनको कभी थे हम नज़रंदाज़ करते, धड़कन बन दिल में वो समाने लगे [...]

हाइकु : जर्जर काया

हाइकु जर्जर काया, इच्छाएँ खंडहर, जीने को मरे नम नयन, गालों [...]

हाइकु : जलूं न कैसे

आड़ी - तिरछी किस्मत की लकीरें समझूं कैसे !! मुठ्ठी में बन्द [...]

हाइकू : हैरान धरा

हैरान धरा, फसलों की जगह, मकान उगा ! सिमटे घन, जब रूठ धरा [...]

मेरी कविता

चहूँ ओर सूरज के घूमें धरती वैसे ही... हर रचना का केन्द्र तुम [...]

नवजीवन

आशंकित सी मैं थी व्याकुल... दर्द- वेदना से आकुल मिला चैन थमा [...]

सपनों की महानगरी

देख शहर की ऊँची अट्टालिकाएँ, मस्ती भरा आलीशान जीवन लिए [...]

कैसी विडम्बना…

कैसी विडम्बना ! क्यों संवेदनहीन है बना समाज,,, हादसों के [...]

अक्सर दिखते हैं…

अक्सर दिखते हैं... लाल बत्ती पर... तो कभी फुटपाथों पर ! कभी आँसू [...]

तेरे बिन

बिन तेरे तेरी यादों में मुमकिन है... मैं जी जाऊँ बेखबर हूँ... [...]

नींदें चुरा के मेरी

नींदें चुरा के मेरी, चैन से वो सो गया है कल तक था दिल जो मेरा, [...]

किस्मत

आरजू थी बस इतनी ....  बन दुल्हन तेरी मैं, तेरे घर में आऊँ   [...]

वक़्त-बेवक़्त तू याद आने लगा है…

छाने लगा फिर है, ख्वाहिशों का मौसम सरूर मुहब्बत का, सताने लगा [...]

मेरी बिटिया

मेरी बिटिया घुटनों बल चलती, ठुमकती - थिरकती, कभी आँचल में [...]