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Author: अनीला बत्रा

अनीला बत्रा
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'ऐ ज़िन्दगी कुछ ख़ास नहीं हैं चाहतें मेरी, थोड़ी सी मुस्कान लबों पर और थोड़ी सी पहचान दिलों में..' पंजाब के शिक्षा विभाग में सीनीयर सैकेंडरी स्कूल में हिन्दी विषय की अध्यापिका हूँ।पंजाब विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में आॅनर्स और एम.ए.(हिन्दी) किया है। भाषा मुझे अत्यन्त प्रिय है और हिन्दी साहित्य में रुचि है।प्रयास करती हूँ कि मेरे कारण किसी के हृदय को ठेस न पहुंचे।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

ख्वाहिशें

समेट लूं कुछ पल, जी लूं कुछ लम्हे कि जिंदगी तुझसे मोहब्बत हो [...]

मन

कभी कभी तन्हाई भी खूबसूरत लगती है और कभी किसी के साथ को मन [...]

हसरतें

कुछ हसरतें जिंदगी की राह में यूं शामिल हो गई, उन की ताबीर मेरे [...]

ज़िन्दगी की उलझनें

ज़िन्दगी की उलझने कभी कभी इतना सताती हैं मुझे अपने बचपन के [...]

एक प्रश्न

आज बस में बैठे-बैठे बाहर बस स्टैंड पर खड़े उसे देखा क्षीण [...]

फ़ासले

लहरों की तरह आगे हम बढ़ते रहे, दायरे हमारे और भी सिमटते [...]

हिन्दी

मंदिर की घंटियों सी मीठी ध्वनि है हर इंसान के ह्रदय में धीरे [...]

दूसरी बिटिया

पलकें जब अपनी खोली थी मैंने, एक नया संसार सामने था। एक नया [...]