साहित्यपीडिया पर अपनी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए यहाँ रजिस्टर करें- Register
अगर रजिस्टर कर चुके हैं तो यहाँ लोगिन करें- Login

Author: Ambarish Srivastava

Ambarish Srivastava
Posts 74
Total Views 333
30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव एक प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। प्राप्त सम्मान व अवार्ड:- राष्ट्रीय अवार्ड "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड 2007", "अभियंत्रणश्री" सम्मान 2007 तथा "सरस्वती रत्न" सम्मान 2009 आदि | email:ambarishji@gmail.com

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

कसम तुम्हें नेता सुभाष की….गीत.

आओ बच्चों सुनो कहानी, अपने हिन्दुस्तान की. नित प्रति होती [...]

सहिये इस चाबुक की मार…वीर छंद (आल्हा)

वीर छंद (आल्हा) संविधान में सबको शिक्षा, औ समानता का [...]

करे समर्थन वो गद्दार….

आरक्षण संहारक नारे... विघटनकारी घातक वार, राजनीति का यह [...]

करिए नष्ट समूल….( छंद दोहा)

काले बादल छा चुके, आरक्षण चहुँ ओर. दे अयोग्य को नौकरी, करे देश [...]

हमारा ही घर खूब….: मुक्तक

मज़हब से मुल्कों को बाँटा तुम्ही ने. चुभाया बदन में ये काँटा [...]

वाह वाह क्या बात….छंद कुण्डलिया.

___________________________________ लड़ते हैं गोमांस पर, भक्षक, श्वान [...]

वाह! कमाया नाम…..: छंद कुण्डलिया

________________________________ कुण्डलिया: पेरिस पर हमले किये, वाह! कमाया [...]

रंग हरा यदि किन्तु….: छंद कुण्डलिया.

केसरिया सविता उगे, केसरिया हो अस्त. हरियाली उस सूर्य से, [...]

ग़ज़ल: करिए न ऐसा काम….

बेशक लिखें दीवान में मसला जुबान का उससे कहें न राज जो कच्चा [...]

चौराहों पर दण्ड उन्हें दें…..गीत

आओ साथी सुनो कहानी, अपने हिन्दुस्तान की. व्यर्थ यहाँ होती है [...]

ग़ज़ल : सबसे ही अलग बात है…

___________________________________ अपने लिए तलाश तो ईमानदार की. भूले मगर वो राह [...]

जड़े होठों पर ताले…:शाश्वत कुण्डलिया छंद

बहता क्योंकर अनवरत पक्षपात का द्रव्य. अर्जुन अवसर पा रहा, [...]

असहिष्णुता किधर है…:मुक्तक

त्यौहार में मजा ले, कुछ ख़ास काट डाला, बक़रे का नाम देकर, फ्रिज [...]

छटपटाता कसमसाता ….:मुक्तक

मथुरा के जवाहरबाग़ काण्ड में शहीद जवानों के प्रति [...]

आपा खोया रँगरूटों नें …मुक्तक

बरस रहा बारूद, बाग़ में, बचे, छुपे, संज्ञान लिया, अधिकारी की देख [...]

स्नेह और नीर …..:मुक्तक

स्नेह से नीर मित्र भारी है किन्तु इनकी सदा से यारी [...]

पर पंक्षी के पंख नोचता…:मुक्तक

जेठ मास में भीषण गर्मी लू घातक बीमारी है. सूखे ताल-तलैया [...]

सॅंभले मानव जाति…कुण्डलिया

ईश्वर से प्रतिभा मिले, सत्संगति से ख्याति. अहंकार उपजे [...]

यहीं यमलोक दिखा दे….हास्य-कुण्डलिया

सोती पत्नी के निकट, बैठी नागिन झूम. बोला पति डस ले वहीं, मत [...]

छमिया, मुखड़ा तो दिखा…:हास्य-कुण्डलिया

कपड़ा मुँह पर था बँधा. दोपहिया पर नार. छमिया, मुखड़ा तो दिखा, खोल [...]

पति ने पटका देखकर….:हास्य ‘कुण्डलिया’

पत्नी घूमे यार सँग, करे प्रेम व्यवहार. पति ने पटका देखकर, [...]

‘सैनिक मत बलिदान करें!’…: मुक्तक

महारथी हैं सत्ता के जो जागें, सुधरें, ध्यान धरें. सबसे ऊपर देश [...]

‘मेघ बरसें बने तन ये चन्दन’ : नवगीत

राह तकती धरा आस में मन मेघ बरसें बने तन ये चन्दन आ चुका है [...]

मित्र के प्रति : मुक्तक

कवि मित्र डॉ० मनोज दीक्षित के प्रति.... प्यारे भ्राता पिंगल [...]

भाभी बोलीं बाय-बाय…: हास्य घनाक्षरी

रोज रोज आते जाते, भाभीजी को छेड़ें भैया, बाय-बाय चार बच्चों, [...]

शहीदों के लहू का वो …: गीत

कारगिल के शहीद कैप्टेन मनोज कुमार पाण्डेय को समर्पित... (जन्म [...]

झूठ की अम्मा रो दी…:हास्य कुण्डलिया :

मोदी, राउल भूख में, भटके रेगिस्तान. मस्जिद देखी सामने. संकट [...]

बंधु जानिये मर्म…दोहे

अतिशय धन की लालसा, बनी कोढ़ में खाज. भौतिकता में बह रहा, 'हिन्दू' [...]

समझ सकें यदि मर्म…: छंद कुण्डलिया

दुविधा में चन्दा बहुत, कैसे कह दे मर्म. रहे प्रकाशित सूर्य से, [...]

‘सामने होगा सागर’ …: छंद कुंडलिया.

सागर खोजा ज्ञान का, किन्तु मिली दो बूँद. उन बूंदों में [...]