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Author: अमरेश गौतम

अमरेश गौतम
Posts 15
Total Views 208
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बघेली मुक्तक और समसामयिक शायरी

आंधर बनें बटइया,अपनेन क बांटत हं, सुधबन के मुंहु, कुकुरबे [...]

समसामयिक

छोड़ दो कोशिशें किसी को जगाने की, अब कहां फिक्र है किसी को [...]

बेटियाँ

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह, पनपती आधार हैं। बेटियाँ ही अनवरत, [...]

नोटबंदी-एक सिलसिला

कैसा विरोधाभास है ये, खाने के लाले भी हैं, और तरक्की की बात [...]

नोटबंदी-एक सिलसिला

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये [...]

मेरा सिद्धांत

आदर्श मेरा वो नहीं, जो शीर्ष पर आसीन हो, और अपने कर्म से, [...]

नोटबंदी-एक सिलसिला

गड्डी महलों की निकली या न निकली, अपने बटुए से नोट पुराने चले [...]

कोई तो है

सोई हुई रातों में, धड़कनें बढ़ाती है, कोई तो है जो दिल को [...]

नोटबंदी – बघेली कविता

रहा फैसला निकहा दादू, होइ गइ चूक समीक्षा मा। बिन तइयारी [...]

शहादत पर

एक पल के लिए बनाने वाला भी रोया होगा, किसी का अरमान जब यूँ मौत [...]

समसामयिक

आसार नहीं अच्छे दिन के, ये केसर क्यारी के दंगल। नहीं भा रहे [...]

योजना है

सुनो एक योजना है।   जब तलक पूरी न होगी,   इस जहाँ में जिद [...]

तो याद करना

कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना, जिन्दगी में [...]

अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं

न देखिये यूं तिरछी निगाहों से मुझे, अभी-अभी तो होश में आया [...]

खुश्बू जानी-पहचानी थी

मुद्दतों बाद वो दिखे मुझे, पर अपनों की निगरानी थी, खुश्बू [...]