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Author: sushil yadav

sushil yadav
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मुझे जो लूट ले……

पुराना वो समय-शहर कहाँ है मुझे जो लूट ले रहबर कहाँ है दुआ [...]

इस तरफ आएगा कौन…..212 212 212

सब के आगे उदासी न रख तलब को और प्यासी न रख है मुझे रात भर [...]

भूल गये तुमको …..

भूल गये तुमको, यूँ बातों ही बात में हम इतने भीगे तनहा [...]

2122 :1222 : 122: 12 :: एक बार जो पहना …..

जिंदगी कौन तुझसे, मसखरी कर सका लड के कहाँ उम्र,अपनी बड़ी कर [...]

1222: 1222: 122, तलाश आया हूँ

तुफानों का गजब मंजर नहीं है इसीलिए खौफ में ये शहर नहीं [...]

मुक्तक

2122 2122 2122 गलत राय गलत मशवरा देने वाले मुंसिफी की आड़ फतवा देने [...]

काश सभी कुछ …

काश सभी कुछ सोचा हो जाता समझो कितना अच्छा हो जाता तेरे [...]

2122:1212: 2211: 2122: 2 फर्क पड़ता नही…ं

नाव को फेंक, पाँव में, जो भँवर बाँध लेते हैं लोग नादान जीने का [...]

उनसे चाह के मागना……21212 : 21212: 212

वस्ल की रिदा में तन्हाई देते रहे स्याह अंधियार परछाई देते [...]

किया-धरा रह गया ….

1222 1212 212 -- जख़म मेरा कहीं हरा रह गया किया सारा, किया-धरा रह [...]

विरासत की जमीनों को ..सुशील यादव ..

बदल मेरे छत को भिगोने नहीं आते आसान से सदमो में रोने [...]

देख तुम्हारी सादगी ,

अपने-अपने दंभ को ,भूल-बिसर के आज शामिल होली में रहो ,जुड़ता [...]

सीने में लिखा नाम

सीने में लिखा नाम धुआँ-धुआँ है शहर में, हवा नही है मै जो बीमार [...]

उन दिनों ये शहर…..

उन दिनों ये शहर...... उन दिनों ये शहर बेतरतीब हुआ करता था मगर दिल [...]

अपोजीशन की होली ….

अपोजीशन की होली .... नत्थू,! इस देश में गलाकाट प्रतिस्पर्धा [...]

नन्द लाल छेड़ गयो रे

उस जमाने में नंदलालों को छेड़ने के सिवा कोई काम नहीं था [...]

तेरा,मेरा फेरा …..

छन्न पकैया छन्न पकैया ,दूभर है अब जीना एक उधर फागुन [...]

कोई दीवार तो ढूढ….

रोने की बात पर कहकहा लगा भाई समय के साथ ही निशाना लगा भाई [...]

छन्न पकैया ….

छन्न पकैय्या छन्न पकैय्या, चिर्पोटी बंगाला अमसुर होवत राज [...]

किताबों में दबे फूल का मौसम ..

रवानी खून में ,ख्यालो मे ललक नहीं है तेरी आँखों में पहले की [...]

पारस कहु ले लान के…. छतीसगढ़ी दोहे

लोकतंत्र के नाम ले ,पार डरो गोहार कुकुर ओतके भोकही ,जतके चाबी [...]

छत्तीसगढ़ी

लुलवा के हाथ म डफली तोतरा करा तुतरु हवय फस्करा के कब [...]

राजनीति के छल-कपट,

संग तुम्हारा छोड़ के,कहीं न जाती नाथ गठबन्धन निभती रहे [...]

तितली …सुशील यादव

ऐसी तितली वैसी तितली जाने कैसी-कैसी तितली --फूल-फूल का रस [...]

बात पहुचानी है सुशील जी ….2122, 2212, 2212,2122

आँख में आंसू, तलब का जखीरा ले के क्या करोगे हर किसी के आगे [...]

छतीसगढ़ी ::प्यास मरत हन ::

हमू ला कछु निशानी दे दो चुहके बर आमा चानी दे दो # मरत प्यास [...]

छतीसगढ़ी :: असल हमर चिन्हारी नइये ::सुशील यादव

हमर हाथ म रापा नइये, हमर हाथ कुदारी नइये तोर ठप्पा का [...]

जिसे सिखलाया बोलना…..2122 १२२२ 2212

चश्म नम और दामन तर होने लगा जिन्दगी सादगी से बसर होने लगा जो [...]

सोचती हूँ तुझे…..२१२२ १२२२ १२२२ २

~ सोचती हूँ तुझे सब ध्यान में रखती हूँ ये शराफत जतन से म्यान [...]

व्यंग :::मन रे तू काहे न धीर धरे

II मन रे तू काहे न धीर धरे II मेरा मन 8/11 के बाद जोरो से खिन्न हो [...]