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Author: Ashok Kumar Raktale

Ashok Kumar Raktale
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विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

सावन ( दोहा छंद )

काँपी रह-रह घाटियाँ, आया विकट असाढ़ | थर्राए गिरि देख कर , लाया [...]

हो उजाला ज़रा दीप ही बार दो

मुड़ न जाएँ कदम ये बदी की तरफ दोस्त जाना नहीं मतलबी की [...]

मन उस आँगन ले जाए (गीतिका)

आकर साजन तू ही ले जा क्यूँ ये सावन ले जाए अधरों पर छायी मस्ती [...]

दुश्मन नए मिले

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले [...]

खपरैल. (दोहे)

मिट्टी के खपरैल घर , संजोये हैं गाँव | वही चर्मराती खाट औ, घने [...]

कुण्डलिया

बूँदे लेकर रसभरी , वसुधा को महकाय | क्या है मन में मेघ के, कोई [...]

तम से लड़ी है जिंदगी

मौत है निष्ठूर निर्मम तो कड़ी है जिंदगी जो ख़ुशी ही बाँटती हो [...]

कह-मुकरी

उसका रूप भुला ना पाऊं, छोडूं ना मैं जब पा जाऊं, उसके बिन यह [...]

बेबस बदन देखा

हमने यहीं पर ये चलन देखा हर गैर में इक अपनापन देखा देखी [...]

भीनी प्रेम फुहार

ले-लेकर घन दौड़ती, यहाँ-वहाँ दिन रात | वही हवा बरसात की, लाती शुभ [...]

मुक्तक.

1 बोझ में मँहगाई के मत देश को उलझाइये कौन कहता है जमीं पर चाँद [...]

कुण्डलिया

मँहगाई नकदी रहे, होती नहीं उदार | इसका कब शनिवार या, होता है [...]

घर बिखर गया

खूँ हो गया सफ़ेद कोई जैसे मर गया रिश्तों से रंग प्यार का ऐसे [...]

दोहे/ नैन हुए नमकीन.

मृगनयनी शरमा गई, छवि अपनी ही देख | अपलक रही निहारती, पैर ठुकी [...]

मनहरण घनाक्षरी / कैसी सरकार है.

मेरा भी कहा न माने, तेरा भी कहा न माने, किसी का कहा न माने, कैसी [...]

प्यार भरा अहसास.

रहे उदासी दूर ही,....जबतक माँ हो पास | माँ की ममता में छुपा, प्यार [...]