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Author: अजय कुमार मिश्र

अजय कुमार मिश्र
Posts 31
Total Views 2,328
रचना क्षेत्र में मेरा पदार्पण अपनी सृजनात्मक क्षमताओं को निखारने के उद्देश्य से हुआ। लेकिन एक लेखक का जुड़ाव जब तक पाठकों से नहीं होगा , तब तक रचना अर्थवान नहीं हो सकती।यहीं से मेरा रचना क्रम स्वयं से संवाद से परिवर्तित होकर सामाजिक संवाद का रूप धारण कर लिया है। कविता , शेर , ग़ज़ल , कहानियाँ , लेख लिखता रहा हूँ।

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

बेबस को सताना ही अब दस्तूर हो गया

कुछ इस तरह ज़माने का दस्तूर हो गया थोड़ा जो उठ गया वो मद में [...]

दो माचिस की डिबिया

ये लाइक भी ले लो ये माइक भी ले लो भले छीन लो मुझसे संचार यंत्र [...]

दर्द अपने मैं काग़ज़ पर उतार देता हूँ

सिलसिला दर्द का थम गया होता, तू अगर मेरा ही बन गया [...]

हर कोई इतना ही अब दिलदार होना चाहिए

बिक रहा है झूठ तो इस क़दर जहान में, सच का भी तो कोई बाज़ार होना [...]

मेरी तरह वो भी बिखरता होगा

आया निकल मैं गाँव से दूर, पता कोई मेरा पूछता होगा। बात मन की [...]

पसीने से ख़ुद को तो भिगाया करो

ग़म की हो या हो ख़ुशी का ही पल दोस्तों को तुम मत भूल जाया [...]

मुक्तक

(1) ख़्वाब बुनता हूँ फिर उनको तोड़ जाता हूँ, ख़ुद को मैं तो [...]

हौसला ज़िंदा

१ ख़ामोश रात, सुलगा अहसास, तुम बिन मैं! २ ज़िंदगी जंग, किसी [...]

प्रेम का ज्वार : भाग-२

प्रेम का ज्वार-भाग-२ ------------------- समय इसी तरह गुज़रता रहा । [...]

आँखों में पानी क्यों नहीं

ढूँढ रहा हूँ मैं तो जवाब इस सवाल का वतन पर मिटती है अब जवानी [...]

न जाने किस घड़ी में ज़िंदगी की शाम हो जाए

जीवन के हर पल को खुलकर ही तुम जी लो, न जाने किस घड़ी में [...]

ऐ ज़िन्दगी, तूने बनाया ही कितना रूप है

ऐ ज़िंदगी , तूने तो बनाया ही कितना रूप है, कैसे-कैसे रंग अब तक [...]

देती है मुझे मौन वेदना

शब्दों की तराश करता हूँ, गीत नए-नए ही बुनता हूँ, जिन राहों में [...]

एक मुक्तक

एक मुक्तक ख़याल ही अब तो बे ख़याल हो गए जवाब भी अब तो ख़ुद [...]

साथ ऐसा तुम मेरा निभाया करो

साथ ऐसा तुम मेरा निभाया करो, मेरे जीवन का साया बन जाया [...]

तेरे प्यार का अहसास मुझको मुक्त करता है

बड़ी फुरसत से ख़ुदा ने तेरी सूरत बनायी है तभी तो तूने सूरत में [...]

थोड़ी राह ही शेष है

पाँव में छालें बहुत हैं , दूर तक कैसे चलूँ , पथ तो है अग्नि [...]

मेरा वेलेंटाइन ज्ञान

आजकल एक वीक चल रहा है , जिसका समापन एक विशेष डे से होगा। रोज [...]

अभिलाषा के पंख फैलाओ

अभिलाषा के पंख फैलाओ कर्मों का विस्तार करो, स्वेद बिंदुओं [...]

ये जीवन है चंद वर्षों की

ये जीवन है चंद वर्षों की , फ़िक्र में क्यूँ इसे गुज़ारूँ [...]

ज़िंदगी की राह आसान हो जाए

हो हौसला तो मुश्किलें परेशान हो जायें, राह की बाधाएँ ही ख़ुद [...]

कविता भी बनी प्रोडक्ट है

अजब है दुनिया यहाँ चलती का नाम ही गाड़ी है, चलते-चलते ठहर गया [...]

ख़यालों में उनके उलझने लगे हैं

नज़र ये मिली है उनसे ही जबसे हसरतें तो दिल के सँवरने लगे [...]

वो क़ीमत लगाने आ गए

बिक रहे थे जज़्बात मेरे वो क़ीमत लगाने आ गए/ भर रहे थे जो [...]

ज़िंदगी की दौड़

ज़िंदगी बढ़ रही आगे-आगे , आगे -आगे, मैं इसके ही पीछे दौड़ रहा [...]

ऋतु बसन्त आ ही गया है

वसुधा का श्रृंगार किया है नूतन उमंग नव आस लिए ऋतु बसन्त आ [...]

मुझसे रु-ब-रु तो हो

आए हो मुझसे मिलने तुम मुद्दतों के बाद दे सकते क्या वक़्त का [...]

प्रेम का ज्वार-१

भाग-१- प्रेम का ज्वार ----------------- प्रीति बेलि जिनी अरुझे [...]

फिर ज़रूरत क्या रोशनी की

रहनुमा जब हो ही जाय अंधा क्या ज़रूरत फिर रोशनी की। जहाँ [...]

पुत्रियाँ

पुत्र की चाहत,हो उसी की बादशाहत हमारे समाज की यही मनोवृत्ति [...]