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Author: Brijesh Nayak

Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

तरुण जाग जाए

तरुण जाग जाए स्वराष्ट्र का तब ही तो सचमुच विकास है | जन जन के [...]

कलम लिख दे, गीत गाए भारती |

कलम लिख दे,गीत गाए भारती| आम-जन दौड़े-उतारे आरती| दिव्यता [...]

सहज बने गह ज्ञान,वही तो सच्चा हीरा है |

जोब विष को पीना जाने, वह ही तो मीरा है| मूरख के आगे, अक्ली की [...]

तरुण वह जो भाल पर लिख दे विजय|

तरुण वह जो भाल पर लिख दे विजय | शरम से आँखें झुकाता है प्रलय [...]

खींचो यश की लम्बी रेख

'नायक' अपनी छवि को देख| लिखोआप मानवता लेख | छोड़ ईर्षा-भ्रम का [...]

जन्मोत्सव

सत् अभिनंदन प्रेम का , निर्मल बनो सुजान| जन्मोत्सव पर मिले [...]

मुस्की दे, प्रेमानुकरण कर लेता हूँ

बैरी से भी ज्ञान ग्रहण कर लेता हूँ अमल भाव में चार चरण कर [...]

लंबे चौड़े दिखें, किंतु है खाली बक्सा

(मुक्त छंद) "नायक" आधी मुड़ाकर, मार रहे हैं धाँक| ना सज्जन से [...]

जल रहे अज्ञान बनकर, कह रहे मैं सीख हूँ

श्रेष्ठ ,ईर्ष्यमाण बन जाए, मैं नीचे ठीक हूँ| उच्चता सद्ज्ञान [...]

मनुज विश्व-मल ढो रहा, बनकर जगत्-कहार /गाँव सुविकसित तभी जब क्षरे हृदय-मल-चूल

बेशर्मी की नाक बन ,फैला भ्रष्टाचार| मनुज विश्व -मल ढो रहा, [...]

न निकली आह है

पुरस्कारों की, न मुझको चाह है | खिलखिलाहट से हमारा ब्याह है [...]

फूल मैं/हिंद के अनुकूल-सा

दोपहर की धूल में, पड़ा,दूँ सुख-चूल मैं| गम न, मुझको रौंद दो| [...]

उन बिन, अँखियों से टपका जल

उन बिन,अँखियों से टपका जल अमल कपोलों पर अटका जल घन गरजे , [...]

तभीआनंदित हृदयअविराम हो |

जागरण दीपक बनो, सम्मान हो | विचारों की सुगति की पहचान हो | [...]

जो पकड़े वह उर बने, गहन सहजता हर्ष|/ निज को जानो, तब मिले, प्रीति ह्रदय का सिंधु|

संस्कृति प्रेमाकाश सह, दिव्य ज्ञान-उत्कर्ष| जो पकड़े, वह उर [...]

कौन कहता कि स्वाधीन निज देश है?

कौन कहता कि स्वाधीन निज देश है? कोख पर नग्नता नाचती ठेश है [...]

दीप बनकर मैं, घनी -काली निशा में जल रहा /इसलिए कठिनाईयों का खल मुझे न छल रहा

दीप बनकर मैं, घनी- काली निशा में जल रहा| ज्ञानमय पावन सुपथ सह [...]

पकड़ो आत्म-सुबोध,दिव्य गुरु का साया तुम

तुम ,नव संवत पर बनो, मानवता-महबूब| ग्रहण करो सद्ज्ञान तब, [...]

बन जाओ कोयल

कोयल मीठा बोल कर,प्राप्त करे सम्मान| हर्षित कर जन-हृदय को, बन [...]

समय-सुगति पहचान , यही है संसारी सच

सच बसंत ऋतु आ गई,कोंपल बनी प्रधान| प्रिया होंठ मुस्कुराहट, [...]

समल चित् -समान है/प्रीतिरूपी मालिकी/ हिंद प्रीति-गान बन

(1) समल चित् -समान है ........................... सजगताभिमान है| सुबुधि गह महान [...]

और दिव्य सद्ज्ञान,प्राप्तिहित गुरु-गुण गह जन

जन गह कर ज्ञ-उच्चता, बने नेह-सद्हर्ष | देव-तुल्य सम्मान का, छू [...]

प्रेम बनो,तब राष्ट्र, हर्षमय सद् फुलवारी||

फुलवारी में फूलते, बहु रंगों के फूल| पवन चली,चुंबन सहित,बने [...]

मेरी भी चिंता करो, सोच रहे हैं दांत/ बना भ्रांति-लांगूट यही है जगत् की वमन

बमन कर रहा क्रोध की, उछल -उछल नौ हाथ| मेरी भी चिंता करो, सोच रहे [...]

कलम के सिपाही

सिपाही कलम के नमन तुमको मेरा| अँधेरा छँटे, करिए ऐसा सवेरा| [...]

सुदामा/आत्म ज्ञान के पथिक, प्रेम की वसुंधरा वह

(1) प्रेमी के हित कृष्ण ने, समता रख मान| राज्यसभा से दौड़ कर, [...]

बन विवेक-आनंद,कह रहा संवत्सर नव

नव संवत्सर पर बनो, आप ज्ञानमय प्राण| तब ही राष्ट्र प्रसन्न [...]

नव वर्ष की शुभकामनाएं

साल नूतन तुम्हें प्रेम-यश-मान दे नित वसंती हवाओं का अनुदान [...]