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Author: Brijesh Nayak

Brijesh Nayak
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-नाम-बृजेश कुमार नायक -पता-सुभाष नगर कोंच उ.प्र.285205 -E mail-brijeshkumarnayak1961@gmail.com -मोः9455423376whats app-9956928367 -प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" खण्ड काव्य| (साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित) -सम्मान -अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत| -आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

मनुज, सद्गति बोध-प्रेमी भानु होगा

चेत गह ,तब हिंद ऊँचा बन सकेगा| ज्ञान लौ पर ही, सुपोषक फल पकेगा| [...]

संवेदना घर

सत्य, नायक वही जो नव चेतना भर | राष्ट्र को उत्थान दे, जन वेदना [...]

चेतना के पंख ही जब छँट गए हैं

सुकवि भी अब समूहों में बँट गए हैं| ज्ञान सूरज,जग धुआँ-सम भट [...]

कवि वही / दिव्य सत् दे भाव को दिल में उतारे

कवि वही जो राष्ट्रहित हरदम पुकारे| ज्ञान ऊँँचाई को गह, न [...]

आतमा की सबल लौ दिल में जगा लो/तभी तो सद्ज्ञान का सम्मान होगा

सहजता के आवरण को अब सँभालो| अहंकारी मैल को धोकर निकालो [...]

मजबूतियाँ व्योहार में दीं

डगर की अड़चनों ने मजबूतियाँ व्योहार में दी | आत्मबल की [...]

ढल गया सूरज बिना प्रस्तावना

जन्म पाकर खेल सह सद्भावना| युवावस्था प्यार की संभावना [...]

कवि

सूर्य भी निस्तेज-सा यदि तू सुकवि, बन बढे, हिंसा छटे सद् प्रेम [...]

कवि /मुस्कुराहट लिख दे, निद्रित प्राण पर

कवि वही जो चलता सत् किरपान पर | प्रेम वन छा जाए द्वंदी बाण पर [...]

भाव तज बाजार है

कौन कहता प्रीति- मग गुलजार है| हृदय अब भी चेतना बिन क्षार है| [...]

सुख की पावन चूल रही

(विधा-बाल गीतिका) नाना -नानी आनंद मगन, घररूपी बगिया फूल रही | [...]

राष्ट्र विकसित वह जहाँ जागी जवानी

जोश को यदि होश की दें दिशा ज्ञानी | फैल जाए रोशनी, तम की कहानी [...]

प्रेम ईश है

ढाईआखर प्रीति का पढ़लो बन जाओ तुम पंडित ज्ञानी| बिना चाह के [...]

वह फूल हूँ

देश वीरों के चरण की मैं सुपावन धूल हूँ | मातृ-क्षित के अति [...]

जीवनी स्थूल है/सूखा फूल है

जीवनी स्थूल है ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़ ईश्वर पत्थर [...]

हृदय वीणा हो गया

जल उठे साथी तो मेरा चौड़ा सीना हो गया | ज्ञानगुरु-चौखट तथा [...]

ज्ञान-दीपक

सूर्य डरता ना कभी भी बदलियों के राज से| कुछ समय तक छिपे पर वह [...]

दिल को सादर करो

प्रीतिमय व्योम बन दिल को सादर करो वह सहम जाएगा ना अनादर करो [...]

दुखता दिल

कूड़ा जी औ बुधि-सागर में थोड़ा यौवन के आँचल में बढ रही [...]

प्रकाश एवं तिमिर

राष्ट्रहित के ज्ञान का आकाश बन| नेहरूपी प्रबलता की प्यास बन [...]

ज्ञान /प्रेम

बाँँटे ज्ञान "बृजेश" नित, बन अशोक जयमाल | कमियों पर चिंतन करे [...]

राष्ट्र की पीड़ा

दुःख-दरद के संग में, दिखी भूख की पीर| कैसे बोले राष्ट्र का, [...]

जीना सीखो

अमन -चैनमय वीणा सीखो नेह- शांतिरस पीना सीखो ज्ञान-भाव का [...]

माँ

मातु , दिल की चेतना आनंद का आकाश है | शिशु-सुजीवन अति सुहावन [...]

माँ

मातु प्रियताभाष में सद्भाव का संगीत है | आत्मसत् नजदीकियों [...]

माँ/संसार

स्वार्थी संसार , सब जन बुद्धि के कोहिनूर है | आत्मा की नहीं [...]

माँ

श्वास से श्वासा मिली,चुंबन मिला,आनंद था| माता के हर रूप में, [...]

बेटियाँ

सुताओं में माँतु-अॉचल, दिखे पति की पूर्णिमा| पिता की हर भावना [...]

बेटियाँ

सुताएं,आवाज कोयल की, दिलों का राग हैं | आज पितु की सुबह, कल [...]

माँ

माँ का जीवन, माँ की वाणी , मातु की आवाज है | रोम पुलकित, मां की [...]