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Author: बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

विधाएं

गीतगज़ल/गीतिकाकवितामुक्तककुण्डलियाकहानीलघु कथालेखदोहेशेरकव्वालीतेवरीहाइकुअन्य

प्रकृति

प्यार देकर प्रकृति मुस्कुरा-सी रही गीत गाकर दिलों को [...]

प्रकृति

वर्षा ऋतु सद्प्रीति का सुंदर भाव-विधान | क्षण-क्षण मिलन समान [...]

कर्म-पथ से ना डिगे वह आर्य है

सजग कर दे राष्ट्र को आचार्य है | गुरु वही जो आत्मपथमय कार्य है [...]

इसी से सद्आत्मिक -आनंदमय आकर्ष हूँ

छोड़िए आतंक ,तब शुभ मुहब्बत गह हर्ष हूँ | दिल गलाऊँ [...]

शुभ गगन-सम शांतिरूपी अंश हिंदुस्तान का

तिरंगा बन गया लेकिन लट्ठ गह सद्ज्ञान का | इसी से ही उच्चता औ [...]

प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से

शुभ सुहिंदुस्तान हूँ, देखो मुझे आराम से | गुलामीं के निशाँ, [...]

झाँसी की रानी /क्षिति पर तूफाँ-सा आया ,तलवार हाथ ले निकल पड़ी

क्षिति पर तूफाँ-सा आया,तलवार हाथ ले निकल पड़ी| देख फिरंगी की [...]

शुभ स्वतंत्रता दिवस मनाए

शुभ स्वतंत्रता दिवस मनाए ,शुभ स्वतंत्रता दिवस मनाएं | जीवन [...]

सत् हंसवाहनी वर दे,

प्रार्थना ............. सत् हंसवाहनी वर दे, सत् हंसवाहनी वर [...]

मनुआँ काला, भैंस-सा

गंगाजल के बीच में, तन धोबें बन भैंस | मनुआँ काला, भैंस-सा,जे [...]

अधीनता के ही तो आस-पास हैं

अभी तो ऊँच-नीच के कपाट हैं | कहीं हैं ठाटबाट ,कहीं टाट हैं| [...]

अमर काव्य हर हृदय को, दे सद्ज्ञान-प्रकाश

लेखन वह, जो राष्ट्रहित- सजग चेतनाकाश देकर, बने सु प्रीति सह [...]

पर्यावरण बचा लो,कर लो बृक्षों की निगरानी अब

पर्यावरण बचा लो, कर लो बृक्षों की निगरानी अब | प्रकृति-प्रेम [...]

बना कुंच से कोंच,रेल-पथ विश्रामालय||

विश्रामालय रेल का कुंच पड़ गया नाम| गोरों-शासन बाद तक ऋषि को [...]

जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों?

जो दहन होलिका का हुआ है तो क्यों? मन नहीं मिलते हैं, दूरियाँ [...]

सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं | जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, [...]

मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे

मनुज से कुत्ते कुछ अच्छे खाना नहीं पेट भर फिर भी बढ़ा रहे [...]

काँटों में खिलो फूल-सम, औ दिव्य ओज लो

धोकर के मन की कालिख मुख प्रीति चोज लो कांटो में खिलो फूल-सम औ [...]

यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो, ऐसा विज्ञान चाहिए

यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो ऐसा विज्ञान चाहिए जो सोए है उने [...]

जगे युवा-उर तब ही बदले दुश्चिंतनमयरूप ह्रास का

युवक जाग जाए तो, विकसित राष्ट्र, भाल छूता विकास का | अगर सो गया [...]

किंतु गह सद्ज्ञानरूपी लोक लो/ वही तो नवराष्ट्र का उल्लास है

रोक सकते हो मुझे, तो रोक लो बढ़ रहा हूँ, चेतना आलोक लो काट [...]

आ सजाऊँ भाल पर चंदन तरुण

चेतनामय लोकहित जागो निपुण धरणि पर बैकुंठ का हो [...]

धारण कर सत् कोयल के गुण

जागा अधिवक्ता पतला सा त्यागे तन के कीमती वस्त्र ले हाथ छड़ी [...]

युवकों का निर्माण चाहिए

युवकों का निर्माण चाहिए, युवकों का निर्माण चाहिए कलियुग के [...]

भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है

भारत पर स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है [...]

कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता

कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता| कौन मूर्ख है आप [...]

सुबह ना आए, सुजन यदि दीन है|

चेतना बिन नर ,कहाँ स्वाधीन है | ज्ञानमय आलोक तज,दमहीन है | तम [...]

वह सु रचना देश का सम्मान है | छिपी हो जिसमें सजग संवेदना|

राष्ट्रहित गह दिव्यता,दे चेतना | छाँट दे जो सहज में जन-वेदना [...]