__जिग़र का टुकड़ा होती है बिटिया___

राहुल रायकवार जज़्बाती

रचनाकार- राहुल रायकवार जज़्बाती

विधा- कविता

बिदाई के दिन जिगर का टुकड़ा होती है बिटिया…
मगर जन्म होने पर क्यों शोक होती है बिटिया…
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निर्मल संस्कारों की छाँव में पलती है बिटिया…
मगर बेटे की आस में क्यों खलती है बिटिया…
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चंचल पवित्र हृदय-सी होती है बिटिया…
मगर बेटों से परे क्यों होती हैं बिटिया…
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कंधे से कंधा मिलाकर चलती है बिटिया…
मगर उम्मीदों पर खरा उतरती है बिटिया…
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घर के आँगन में लगा तुलसी का पौधा होती है बिटिया…
मगर बेटे की आस में कोख में हुआ सौधा होती है बिटिया…
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अपने हरेक ख्वाब को तोड़कर मुस्कुराती है बिटिया…
मगर बाबुल की रौनक हर वक्त सजाती है बिटिया…
#जज़्बाती…
#rahul_rhs

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राहुल रायकवार जज़्बाती
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उफ़...मीठी_चाय... कागज की नाव... अल्फाज मेरे....कलम तेरी... बस साधारण-सा कलमकार... #जज़्बाती....

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