Kokila Agarwal

रचनाकार- Kokila Agarwal

विधा- गज़ल/गीतिका

२१२२–१२१२–२२
आन रख लेते

हम हथेली पे जान रख लेते
तुम अगर कुछ ईमान रख लेते

यूं तो मैं कुछ नहीं किसी के लिये
तुम ही कुछ मेरा मान रख लेते

तुम तो तुम थे समझ की कच्ची मैं
पहले ही इम्तहान रख लेते

साथ मेरे नहीं चलो छोड़ो
सोचकर गैर ध्यान रख लेते

झूठ से जीतते हो जग को तुम
प्यार में तो ज़ुबान रख लेते

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Kokila Agarwal
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